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कावेरी जल विवाद: विजय के मंत्री का शिवकुमार पर तीखा हमला।
03 Aug 2026
कावेरी जल विवाद में बढ़ी राजनीतिक तनाव
तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद को लेकर बातचीत की कोशिशें अचानक तीखी बहस में बदल गई हैं। हाल ही में, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने कर्नाटक के साथ सीधे संवाद की पहल की थी, लेकिन यह बातचीत टल गई है। इसके बाद थलपति विजय के मंत्री ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मंत्री आर निर्मल कुमार ने कहा है कि शिवकुमार कांग्रेस के नेतृत्व के बजाय डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की बातों पर ध्यान देते हैं। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'डीके शिवकुमार कांग्रेस आलाकमान की सुनते हैं, लेकिन एमके स्टालिन की बातों को प्राथमिकता देते हैं। यदि स्टालिन या उनका परिवार कुछ कहते हैं, तो वे तुरंत सहमत हो जाते हैं।'
सरकार का आधिकारिक रुख स्पष्ट
निर्मल कुमार को सीएम विजय का करीबी माना जाता है और उनके बयान को सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि तमिलनाडु सरकार अब बातचीत को प्राथमिकता नहीं दे रही है और कावेरी जल विवाद का समाधान न्यायालय और ट्रिब्यूनल के माध्यम से निकालना चाहती है।
इससे पहले, सीएम विजय ने कावेरी विवाद पर शिवकुमार से चर्चा करने की पेशकश की थी, लेकिन कर्नाटक में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद यह बैठक स्थगित कर दी गई। टीवीके के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस द्विपक्षीय वार्ता से सरकार को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला है, जिसके कारण अब सरकार ने आक्रामक रुख अपनाने का निर्णय लिया है।
शिवकुमार की मंशा पर सवाल
मंत्री निर्मल कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि स्टालिन ने कर्नाटक दौरे का विरोध करके माहौल बनाने की कोशिश की है, जिससे सीएम विजय इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गए हैं। उन्होंने तमिलनाडु के विपक्षी दल DMK और AIADMK की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में DMK ने कावेरी मुद्दे पर कोई प्रभावी याचिका दाखिल नहीं की।
उन्होंने यह भी पूछा कि विधानसभा में प्रस्ताव के समर्थन के बावजूद, AIADMK ने अदालत में उसे चुनौती क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा, 'क्या वे विधानसभा में सो रहे थे?'
कावेरी और मेकेदातू का विवाद
कावेरी नदी के जल के उपयोग को लेकर दोनों राज्यों के बीच स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं। हालिया मॉनसून में कम बारिश के कारण कर्नाटक में जल संकट उत्पन्न हो गया है, जिसके चलते वह तमिलनाडु को निर्धारित जल आपूर्ति नहीं कर पा रहा है।
कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार मेकेदातू नामक स्थान पर एक नया विशाल बांध बनाने की योजना बना रही है, जिसका तर्क है कि इससे बेंगलुरु के लिए पीने का पानी उपलब्ध होगा। हालांकि, तमिलनाडु इसका विरोध कर रहा है, यह कहते हुए कि यदि कर्नाटक यह बांध बना लेता है, तो नदी के निचले हिस्से में जल प्रवाह पूरी तरह से कर्नाटक के नियंत्रण में आ जाएगा, जिससे डेल्टा क्षेत्र के तमिल किसानों की खेती प्रभावित होगी।
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