Article
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विधेयक लोकसभा से बिना चर्चा पारित
31 Jul 2026
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विधेयक का पारित होना
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विधेयक: लोकसभा ने शुक्रवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण से संबंधित विधेयक को विपक्षी दलों के हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया। इस विधेयक को पहले राज्यसभा में 29 जुलाई को मंजूरी मिली थी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में पेश किया। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी पर नारेबाजी की।
बिना चर्चा के पारित विधेयक
सदन ने बिना किसी चर्चा के विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया, जबकि विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पर अपने संशोधन भी पेश नहीं किए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को 20 जुलाई को मंजूरी दी थी और इसे 29 जुलाई को सदन में रखा गया था। यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के संशोधन के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि विलंब से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और कड़ा किया जा सके।
नए नियमों में क्या बदलाव होंगे
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विधेयक: वर्तमान नियम के अनुसार, यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से किया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है। नए विधेयक में देरी की अवधि के आधार पर दो-स्तरीय मंजूरी प्रणाली का प्रावधान किया गया है। इस कानून के जरिए जन्म और मृत्यु से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से और व्यवस्थित किया जाएगा, और फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
संसदीय कार्य मंत्री का बयान
विधेयक के पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है और 'हम चाहते थे कि सभी सदस्य इसमें भाग लें।' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने बार-बार अनुरोध के बावजूद विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया और अब उन्हें यह नहीं कहना चाहिए कि यह बिना चर्चा के पारित हुआ।
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विधेयक: रीजीजू ने आगे कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता आपसे जवाब मांगेगी। अब आप बाहर जाकर यह आरोप नहीं लगा सकते कि बिना चर्चा के विधेयक पारित कराया गया है। आपने अवसर गंवा दिया है।' उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे आगे आने वाले विधेयकों पर सहयोग करें और चर्चा में भाग लें। पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने भी हंगामा कर रहे विपक्ष के सदस्यों को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि सभी ने विधेयक पर सहयोग की बात कही थी। हंगामा नहीं थमने पर सैकिया ने कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।
Read This Also:- राहुल गांधी ने पुलिस हिंसा पर मीडिया के सवालों को टाला