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नए शिक्षा मंत्री पर BJP नेता की बेटी का हमला, CJP का समर्थन
31 Jul 2026
नए शिक्षा मंत्री: CJP के प्रदर्शन में समर्थन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के परिवारों से समर्थन प्राप्त हुआ। इस संदर्भ में यशस्विनी राजे सिंह का नाम विशेष रूप से चर्चा में रहा। पेशे से कंटेंट क्रिएटर यशस्विनी ने न केवल छात्रों के इस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया, बल्कि अपनी ही पार्टी की सरकार पर तीखा कटाक्ष करते हुए नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को 'भद्दा मजाक' करार दिया।
यशस्विनी, जो उत्तर प्रदेश के पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की पुत्री हैं, खुद भी इस प्रदर्शन में शामिल हुईं। अल जजीरा को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त करने के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए और इसे 'एक बेहद भद्दा मजाक' कहा।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया
नए शिक्षा मंत्री: NEET परीक्षा में धांधली के खिलाफ जेन-जी छात्रों का यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ, जो 36 दिनों तक चला। 25 जुलाई को सरकार ने छात्रों की शेष मांगें मान लीं और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद यह प्रदर्शन समाप्त हुआ।
यशस्विनी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे में प्रयुक्त भाषा की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'इस्तीफे के पत्र की भाषा किसी ऐसे व्यक्ति की नहीं लग रही थी जिसे अपने किए का पछतावा हो या जो अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर रहा हो। बल्कि यह भाषा किसी 'शहीद' जैसी थी।' प्रधान ने अपने पत्र में लिखा था कि वह छात्रों के भविष्य को नुकसान से बचाने और 'राष्ट्रविरोधी ताकतों' को स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए पद छोड़ रहे हैं।
CJP के अनोखे तरीकों की सराहना
नए शिक्षा मंत्री: युवाओं के बीच CJP के प्रदर्शन की लोकप्रियता के बारे में यशस्विनी ने इस अभियान और इसके अनूठे तरीकों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि CJP ने अपने संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए मीम्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम का प्रभावी उपयोग किया।
इस नवोन्मेषी तरीके से CJP ने उन युवाओं को भी आंदोलन से जोड़ा, जो आमतौर पर राजनीतिक बहसों से दूर रहते हैं। देशभर के हजारों छात्रों ने इस आंदोलन में भाग लिया, जिसे कई प्रमुख विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला।
यशस्विनी की राजनीतिक दूरी
यशस्विनी के पिता विक्रम सिंह यूपी की फतेहपुर सदर सीट से भाजपा के विधायक रहे हैं, लेकिन 2024 के चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चंद्र प्रकाश से हार का सामना करना पड़ा। अपनी स्पष्ट विचारधारा और पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के बारे में यशस्विनी ने कहा कि वह अपने पिता के साथ राजनीति पर कोई चर्चा नहीं करती हैं।
नए शिक्षा मंत्री: वह पिछले साढ़े तीन साल से भारत में रह रही हैं, लेकिन अपने परिवार के साथ नहीं, बल्कि अकेले रहने का निर्णय लिया है। उन्होंने कई वर्षों से अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र फतेहपुर सदर का दौरा नहीं किया है। यशस्विनी का कहना है कि वह अपने को राजनीतिक माहौल से पूरी तरह अलग रखती हैं, जिससे वह बिना किसी पाखंड के अपनी बातें स्वतंत्र रूप से कह सकती हैं।
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