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राहुल गांधी बयान पर CJP की सहमति, अमित शाह पर गंभीर सवाल उठे

 30 Jul 2026

राहुल गांधी बयान: राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन

राहुल गांधी बयान: कांग्रेस को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का समर्थन मिलता हुआ नजर आ रहा है। बुधवार को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर सीजेपी ने अपनी सहमति प्रकट की है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छात्रों को निशाना बनाने की अनुमति दी थी, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सीजेपी ने कहा है कि इस मामले में गृहमंत्री की भूमिका संदिग्ध नजर आती है।


राहुल गांधी ने सदन में गृहमंत्री की अनुपस्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'तथाकथित गृह मंत्री' को सदन में आने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री इस कारण सदन में नहीं हैं क्योंकि वह डरे हुए हैं। इसके बाद उन्होंने छात्रों पर बलप्रयोग का जिक्र करते हुए गृहमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा कि राहुल गांधी के आरोप गंभीर हैं और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों पर बलप्रयोग का आदेश किसने दिया।


सीजेपी ने किया सवाल

राहुल गांधी बयान: सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने राहुल गांधी के बयान को साझा करते हुए कहा कि यह 20 जुलाई को हुई पुलिस क्रूरता के मामले में गृहमंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा, 'गृहमंत्री को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। हर जान कीमती होती है। गृहमंत्री के आदेश पर एक छात्र ने अपनी आंखों की रोशनी गंवाई है और इस पर जवाब देना आवश्यक है।'


भाजपा ने आरोपों को झूठा बताया

राहुल गांधी बयान: भाजपा ने राहुल गांधी के उस बयान को 'झूठ' करार दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछले सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर गृहमंत्री अमित शाह के आदेश पर पुलिस ने गोली चलाई थी। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस नेता राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी की इस टिप्पणी की आलोचना की कि शाह 30 गाड़ियों के काफिले में चलते हैं क्योंकि वह डरे हुए हैं।


भाजपा सांसद ने कहा, 'यह झूठ है। शायद प्रधानमंत्री के काफिले में भी 30 गाड़ियां नहीं होतीं। राहुल गांधी, आइए और मुझे दिखाइए कि अमित शाह के काफिले में आपने वे 30 गाड़ियां कहां देखीं?' प्रवक्ता ने आगे कहा कि किसी भी विरोध-प्रदर्शन या मार्च के मामले में मजिस्ट्रेट यह तय करते हैं कि जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही हो तो क्या कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि गृह मंत्री। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गृह मंत्री हर स्थिति के लिए आदेश दे रहे हैं।


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