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एग्जाम रिफॉर्म्स: शशि थरूर ने नंदन नीलेकणि को दिए 5 सुझाव।
30 Jul 2026
एग्जाम रिफॉर्म्स: टास्क फोर्स के अध्यक्ष को खुला पत्र
एग्जाम रिफॉर्म्स: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में थरूर ने वर्तमान परीक्षा प्रणाली को 'संरचनात्मक रूप से पुरानी', 'नैतिक रूप से थकी हुई' और 'बौद्धिक रूप से मृत' बताया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि इस प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की आवश्यकता है, और उम्मीद जताई है कि नीलेकणि के नेतृत्व में इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएंगे।
थरूर ने प्रो. के राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई सिफारिशें लागू नहीं हुई हैं, जिससे सुधार की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
एक ही दिन में परीक्षा न लेने का सुझाव
एग्जाम रिफॉर्म्स: थरूर ने पत्र में लिखा है कि भारत की परीक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा दोष इसका एक ही दिन में आयोजित होना है, जिससे तनाव और पेपर लीक की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका के GRE और SAT की तर्ज पर देश के सभी जिलों में सुरक्षित परीक्षा केंद्र बनाए जाएं, जहाँ साल में कई बार परीक्षाएं आयोजित की जा सकें।
इसके अलावा, थरूर ने क्रिप्टोकरेंसी और क्रिप्टोग्राफिक तकनीकों का उपयोग करते हुए डायनामिक प्रश्न बैंकों के निर्माण का सुझाव दिया, ताकि किसी भी दो छात्रों को एक जैसा प्रश्न पत्र न मिले। इससे पेपर लीक की समस्या का समाधान किया जा सकेगा।
सोचने वाले छात्रों को तैयार करने की आवश्यकता
एग्जाम रिफॉर्म्स: थरूर का मानना है कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली केवल रटने की क्षमता और गति का परीक्षण करती है, जिससे एक असंगठित और शोषक कोचिंग उद्योग का विकास हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अमीर छात्रों को लाभ पहुँचाता है, जबकि गरीब और ग्रामीण छात्रों को पीछे छोड़ देता है।
इसलिए, उन्होंने एक होलिस्टिक एडमिशन मैट्रिक्स का सुझाव दिया, जिसमें प्रवेश परीक्षा स्कोर के अलावा माध्यमिक स्कूल का प्रदर्शन, लेखन कौशल और अन्य गतिविधियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने का प्रस्ताव
थरूर ने कहा कि परीक्षा सुधार तभी प्रभावी होंगे जब विश्वविद्यालय पुराने ढर्रे पर चलना बंद करें। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने की मांग की, ताकि वे आधुनिक विषय जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु विज्ञान और उन्नत जैव प्रौद्योगिकी को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर सकें।
उन्होंने हर स्नातक कार्यक्रम में अनिवार्य इंटर्नशिप, प्रयोगशाला अनुसंधान और सामुदायिक परियोजनाओं को शामिल करने का भी सुझाव दिया।
सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार
एग्जाम रिफॉर्म्स: थरूर का कहना है कि स्नातक कर चुके युवाओं में 40% बेरोजगारी का मुख्य कारण शिक्षा और उद्योग की जरूरतों के बीच का अंतर है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार उन सभी खाली पदों को तुरंत भरे, जिनके लिए अभ्यर्थी पहले ही परीक्षा पास कर चुके हैं।
इसके अलावा, उन्होंने साल में दो बार राष्ट्रीय लोक सेवा अभिरुचि मूल्यांकन (National Public Service Aptitude Assessment) आयोजित करने का प्रस्ताव दिया।
नेशनल टेस्टिंग स्टैंडर्ड्स एक्ट की आवश्यकता
थरूर ने प्रशासनिक विफलताओं के लिए न केवल मंत्रियों, बल्कि निचले स्तर के अधिकारियों की भी जवाबदेही तय करने की बात की। उन्होंने एक नेशनल टेस्टिंग स्टैंडर्ड्स एक्ट बनाने की मांग की, जो परीक्षा रद्द होने की स्थिति में प्रभावित छात्रों को वित्तीय मुआवजा देने की गारंटी दे।
इसके अलावा, उन्होंने एक स्वतंत्र लोकपाल की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया, जो परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल का ऑडिट करे और छात्रों की शिकायतों का पारदर्शी समाधान करे।
आंदोलन कर रहे युवाओं की मांग
एग्जाम रिफॉर्म्स: थरूर ने पत्र के अंत में कहा कि जंतर-मंतर और सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे युवा किसी अनुचित लाभ की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि निष्पक्षता, पारदर्शिता और सम्मान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने नीलेकणि से अपील की कि वे 100 साल पुरानी और ढहती हुई प्रणाली में पैचवर्क करने के बजाय भारत के युवाओं के लिए एक मजबूत और विश्वस्तरीय शिक्षा प्रणाली का निर्माण करें।
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