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भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जिनपिंग और पुतिन की संभावित भागीदारी

 30 Jul 2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी

इस वर्ष सितंबर में भारत में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल होंगे। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इन नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं की संभावना है। यह सम्मेलन मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेदों के बीच आयोजित किया जा रहा है।


जिनपिंग की भारत यात्रा

यदि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो यह अक्टूबर 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। उस समय उन्होंने तमिलनाडु के मामल्लापुरम में पीएम मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। इसके छह महीने बाद, लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास चीनी सैनिकों की घुसपैठ के कारण भारत-चीन संबंधों में खटास आ गई थी। हालांकि, अक्टूबर 2024 में कजान, रूस में एलएसी पर सैन्य गतिरोध समाप्त करने पर सहमति के बाद पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बैठक हुई थी।


सम्मेलन का उद्देश्य और विषय

भारत द्वारा पांच साल के अंतराल के बाद आयोजित इस ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण रखा गया है। सम्मेलन में ईरान और यूएई के बीच मतभेदों का प्रमुख स्थान रहने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2024 में ब्रिक्स के विस्तार के दौरान ये दो देश इस समूह में शामिल हुए थे।


पश्चिम एशिया संकट और द्विपक्षीय संबंध

सूत्रों के अनुसार, यूएई को छोड़कर समूह के अन्य सदस्य देशों ने फिलिस्तीन मुद्दे और 'दो-राष्ट्र समाधान' के संदर्भ को कमतर किए जाने के प्रयासों का विरोध किया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की भागीदारी से ईरान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पश्चिम एशिया संकट की विस्तृत जानकारी देने और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने का अवसर मिलेगा।


विशेष आमंत्रण और मध्यस्थता की भूमिका

भारत ने ब्रिक्स के अतिरिक्त भी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया है। इनमें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का नाम शामिल है, जो बिम्सटेक (BIMSTEC) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किए गए हैं। पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण हुए मतभेदों के चलते ब्रिक्स की कई पिछली बैठकें बिना किसी सर्वसम्मति के परिणाम के समाप्त हुई थीं। ऐसे में भारत को इन मतभेदों को कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभानी होगी।


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