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CJI सूर्यकांत की पुलिस ज्यादती पर सख्त टिप्पणी, जांच की मांग
28 Jul 2026
CJI सूर्यकांत: पुलिस की बर्बरता पर सुनवाई
CJI सूर्यकांत: मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती पर सुनवाई की। अदालत ने निर्देश दिया कि 18 वर्ष से कम उम्र के उन छात्रों को रिहा किया जाए जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इसके साथ ही, कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बरता के खिलाफ सख्त रुख अपनाया।
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की कार्रवाई की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए और किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाले को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नीट प्रश्नपत्र लीक के संबंध में हुए आंदोलनों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखें।
जांच की आवश्यकता पर जोर
पीठ ने छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना के साथ पीठ ने सभी राज्यों को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, और अन्य डिजिटल साक्ष्य संजोने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
अदालत ने दिल्ली सरकार को प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन निर्देश दिया कि जब तक मामले की कार्रवाई लंबित है, छात्रों के खिलाफ बल का प्रयोग नहीं किया जाए।
राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की जरूरत
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की आवश्यकता की बात की है। इसमें पेलेट गन, आंसू गैस, लाठी-चार्ज जैसे आरोप शामिल हैं। कोर्ट ने एक विशेष जांच दल (SIT) या उच्च स्तरीय समिति के गठन का सुझाव दिया। पीठ ने कहा कि इस प्रक्रिया में केवल जवाबदेही तय करना ही नहीं, बल्कि प्रदर्शनों और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल भी बनाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'अगर उल्लंघन होता है, तो जवाबदेही सभी पक्षों की होगी'। उन्होंने यह भी कहा कि 'जो भी ज्यादती करें, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।'
लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का महत्व
ANI न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन को लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा मानते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट राष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर बल दिया कि प्रस्तावित ढांचे में आवश्यक परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों का संरक्षण किया जा सके।
CJI सूर्यकांत ने गंभीर चोटों और अन्य लोगों के खिलाफ की गई हिंसा के मामलों में स्वतंत्र जांच का आदेश देने की आवश्यकता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
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