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अभिषेक बनर्जी ने भेजा 10 करोड़ का कानूनी नोटिस, मानहानि आरोप

 22 Jul 2026

10 करोड़ का कानूनी नोटिस: कानूनी नोटिस का विवरण

10 करोड़ का कानूनी नोटिस: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को पार्टी के पूर्व सहयोगी एवं विधायक मदन मित्रा को एक कानूनी नोटिस जारी किया। इस नोटिस में मित्रा से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और 10 करोड़ रुपये का हर्जाना अदा करने की मांग की गई है। अभिषेक बनर्जी का आरोप है कि विधायक ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर मानहानिकारक बयान दिए हैं।


यह कानूनी नोटिस कामरहाटी के विधायक मदन मित्रा के 19 जुलाई को आयोजित एक फ़ेसबुक लाइव सेशन के संदर्भ में भेजा गया है। इस लाइव सेशन में मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी को 'हत्यारा' बताया था और यह भी आरोप लगाया था कि वह 'सुपारी किलर' को हायर करते हैं। नोटिस में अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए 72 घंटे के भीतर माफी मांगने की बात कही गई है।


नोटिस में लगाए गए आरोप

अभिषेक बनर्जी के अधिवक्ता द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि मदन मित्रा ने उनके खिलाफ कई झूठे और मानहानिकारक बयान दिए हैं। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि मित्रा ने अभिषेक बनर्जी को 'अपराधी' और 'हत्यारा' तक कहा और आरोप लगाया कि वह पैसे देकर हत्या करवाते हैं।


नोटिस में कहा गया है, 'आपने मेरे क्लाइंट के खिलाफ कई झूठे, गैर-जिम्मेदाराना और दुर्भावनापूर्ण बयान दिए हैं। आपके द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार और गलत हैं।' इसके साथ ही, अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि मदन मित्रा को उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान देने से रोकने का भी आग्रह किया गया है।


मदन मित्रा का बागी गुट में शामिल होना

10 करोड़ का कानूनी नोटिस: मदन मित्रा हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के बागी गुट में शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया है क्योंकि वह पार्टी के भीतर अपनी चिंताओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त नहीं कर पा रहे थे। मित्रा का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण उन्होंने अलग रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।


इस स्थिति में, अभिषेक बनर्जी की ओर से भेजा गया कानूनी नोटिस एक राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच की राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।


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