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सुप्रीम कोर्ट में उद्धव सेना का आंदोलन, स्पीकर के फैसले को चुनौती
21 Jul 2026
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा स्वीकृति दिए जाने को चुनौती देते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उद्धव सेना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।
कामत ने पीठ से अनुरोध किया कि याचिका को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'हम देखेंगे।' उन्होंने पीठ को सूचित किया कि लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी प्रदान की थी।
विलय को लेकर उठे सवाल
कामत ने बताया कि अध्यक्ष ने छह सांसदों के विलय को मान्यता दी है, जो एक नई प्रवृत्ति को जन्म दे रहा है, जिसमें सांसद उन दलों में शामिल हो रहे हैं जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है जो लोकतंत्र को प्रभावित कर सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मानसून सत्र शुरू होने से पहले 18 जुलाई को इस विलय को स्वीकृति दी थी। उद्धव सेना ने सर्वदलीय बैठक में भी स्पीकर के इस निर्णय का विरोध किया था और बैठक से वॉकआउट कर दिया था।
संवैधानिक पहलू और बागी सांसदों की स्थिति
शिवसेना (यूबीटी) का यह भी कहना है कि स्पीकर का निर्णय गैर-कानूनी है। उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार एक पार्टी का दूसरी में विलय हो सकता है, लेकिन विधायकों या सांसदों का समूह अपने स्तर पर ऐसा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों को एक अलग गुट बनाने का अधिकार था, इसलिए यह मंजूरी अवैध है।
इससे पहले, बंगाल में चुनाव के बाद टीएमसी के 20 सांसद भी एनसीपीआई में शामिल हो गए थे, जिनके विलय को भी स्पीकर ने मंजूरी दी थी। हालांकि, टीएमसी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कोई कदम नहीं उठाया है।
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