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कोयल मलिक का इस्तीफा: ममता बनर्जी को एक और झटका
17 Jul 2026
TMC में बढ़ती असंतोष की लहर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद Mamata Banerjee की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में असंतोष की लहर तेज हो गई है। कई सांसद और विधायक पार्टी से दूरी बना चुके हैं, जिससे पार्टी की संरचना में गंभीर परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। अब गुरुवार को Koyal Mallik ने अपने पद से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी को एक और झटका दिया है।
कोयल मलिक, जो एक प्रसिद्ध अभिनेत्री भी हैं, को Mamata Banerjee ने इसी साल अप्रैल में राज्यसभा भेजा था। लेकिन अब महज कुछ महीनों के भीतर उनका इस्तीफा आ गया है। हालांकि, उन्हें एक महीने पहले अपने इस्तीफे का इरादा जताते हुए देखा गया था, आज उन्होंने इसे आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किया।
अन्य नेताओं के इस्तीफे का सिलसिला
Koyal Mallik के अलावा, सुष्मिता देव और शुखेंदु शेखर जैसे नेताओं ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। ये नेता बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए और पार्टी की ओर से पुनः राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बने। Mamata Banerjee के करीबी सहयोगियों के पार्टी छोड़ने की यह श्रृंखला विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद और भी बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में 20 से अधिक सांसदों ने काकोली के नेतृत्व वाले गुट के साथ एनसीपीआई में विलय कर लिया है, जबकि 60 से अधिक विधायकों ने भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। हाल ही में, मदन मित्रा ने भी टीएमसी से इस्तीफा देते हुए बागी गुट में शामिल होने की घोषणा की।
मदन मित्रा की बागी गुट में एंट्री
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले विधायक मदन मित्रा ने बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने घोषणा की कि वह तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम को Mamata Banerjee के नेतृत्व वाले गुट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। मित्रा ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद कहा, 'मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।' उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में कोई संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे, जबकि तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने रहेंगे।
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