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बंगाल में ममता सरकार की फाइलें खुलेंगी, न्यायिक आयोग गठित।

 15 Jul 2026

ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल की जांच

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पूर्व सरकार के कार्यकाल से संबंधित फाइलों को खोलने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने एक समिति का गठन किया है, जो पिछले 15 वर्षों में हुई आर्थिक अनियमितताओं की जांच करेगी। इस बीच, राज्य के शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कई कुलपतियों की संभावित गिरफ्तारी का भी संकेत दिया है, हालांकि उन्होंने किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया।


राज्य सरकार ने एक एकल न्यायिक आयोग का गठन किया है, जो 2011 से 2026 के बीच विभिन्न विभागों और एजेंसियों में हुई आर्थिक अनियमितताओं की जांच करेगा। इस आयोग का नेतृत्व कलकत्ता उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज बिस्वाजीत बसु करेंगे। सरकारी आदेश के अनुसार, यह कदम जनता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।


जांच के दायरे में आने वाले विभाग

एक अधिकारी के अनुसार, इस जांच के दायरे में शिक्षा, खाद्य और आपूर्ति, आवास, मछली पालन, उद्योग और गोरखालैंड टैरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) जैसे कई विभाग शामिल होंगे।


चट्टोपाध्याय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के दौरान बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के मद्देनजर, राज्य सरकार की प्राथमिकता शिक्षा प्रणाली को 'भ्रष्टाचार मुक्त और राजनीति मुक्त' बनाना है।


कुलपतियों की गिरफ्तारी की संभावनाएं

एबीपी आनंदा को दिए गए एक साक्षात्कार में चट्टोपाध्याय ने कहा, 'आप पहले ही एक पूर्व शिक्षा मंत्री को जेल जाते देख चुके हैं। आपने अभी तक विश्वविद्यालय के कुलपतियों को जेल में नहीं देखा है। अगर भविष्य में आप प्रेसीडेंसी, दमदम या अलीपुर की जेलों में एक या दो कुलपतियों को देखें, तो हैरान होने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए।'


हालांकि, मंत्री ने किसी विश्वविद्यालय या कुलपति का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी यह टिप्पणी संकेत देती है कि सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में अनियमितताओं की जांच केवल राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों तक सीमित नहीं रखने जा रही है।


राजनीतिक परिदृश्य और TMC की चुप्पी

राज्य सरकार के इस निर्णय पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विधायक ऋताब्रता बनर्जी के समूह ने भी इस पर कुछ नहीं कहा है।


यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है जब राज्य में 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाने की तैयारियां चल रही हैं, और इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है।