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BJP में 'सतलुज' फिल्म को लेकर मतभेद, रवनीत सिंह बिट्टू को वरिष्ठ नेता का जवाब
13 Jul 2026
फिल्म 'सतलुज' पर राजनीतिक विवाद
दिलजीत दोसांझ की अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को लेकर राजनीतिक हलचल तेजी से बढ़ रही है। इस फिल्म के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर ही मतभेद उभर आए हैं। पंजाब के वरिष्ठ नेता इकबाल सिंह लालपुरा ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को कड़ी फटकार लगाई, जब बिट्टू ने फिल्म में दर्शाए गए आंकड़ों पर सवाल उठाए। रवनीत सिंह बिट्टू का कहना था कि फिल्म में यह दावा किया गया है कि पंजाब में 25,000 अज्ञात शवों को गुप्त रूप से जलाया गया था, जो कि गलत है।
बिट्टू के सवाल और लालपुरा की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि यह आंकड़ा सही है, तो इसकी एक सूची भी प्रस्तुत की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "अगर यह संख्या पांच हजार भी है, तो इसे मीडिया, सुप्रीम कोर्ट या किसी आयोग के समक्ष रखा जाना चाहिए।" इस पर लालपुरा ने कहा, "हर कोई अपनी हद में रहे तो बेहतर होगा।" उन्होंने यह भी बताया कि जब जसवंत सिंह खालड़ा ने 25,000 लापता लोगों का दावा किया था, तब इसकी जानकारी उन्होंने न्यायालय को भी दी थी।
इकबाल सिंह लालपुरा का परिचय
इकबाल सिंह लालपुरा, जो पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, ने जरनैल सिंह भिंडरावाले को गिरफ्तार करने वाले अधिकारियों में से एक रहे हैं। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के दावों का समर्थन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी किया था। लालपुरा ने बिट्टू को इस बारे में जानकारी लेने का भी सुझाव दिया।
सांप्रदायिक सद्भावना का महत्व
BJP के सीनियर नेता मनोरंजन कालिया ने इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पंजाब में आतंकवाद के दौरान सांप्रदायिक सद्भावना सबसे बड़ी ताकत थी। उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि उस कठिन समय में भी कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ।" कालिया ने बिट्टू के हालिया पोस्ट को अनुचित बताते हुए कहा कि हमें अतीत की नकारात्मकता को छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।
सतलुज फिल्म का विवादास्पद रिलीज
फिल्म 'सतलुज' को पहले थिएटर में रिलीज नहीं होने दिया गया था और सेंसर बोर्ड ने इसमें 120 से अधिक कट लगाने का निर्देश दिया था। इसके बाद, इसे जी-5 ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया, लेकिन दो दिन बाद ही इसे भारत में बैन कर दिया गया। यह फिल्म अभी भी विवादों का विषय बनी हुई है, और इसे शिरोमणि अकाली दल एवं सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा गांवों में दिखाया जा रहा है। BJP के भीतर भी इस फिल्म को लेकर नेता एकमत नहीं हैं।
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