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PM Modi, Australia: भारत बनेगा ग्रीन एनर्जी का ग्लोबल हब
09 Jul 2026
PM Modi, Australia: प्रधानमंत्री Narendra Modi अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंचे, जहां उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया CEO फोरम को संबोधित करते हुए भारत को वैश्विक निवेश के लिए सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बताया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, ऊर्जा परिवर्तन की रणनीति और भविष्य की विकास योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया।
उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत से भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने का आह्वान किया और कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
PM Modi, Australia: 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य
Modi Australia Visit: प्रधानमंत्री Modi ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। उन्होंने बताया कि यह केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य नहीं है, बल्कि भारत को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
उन्होंने कहा कि भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और जलविद्युत जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। इसके साथ ही देश में सोलर मॉड्यूल, विंड टर्बाइन और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी तेजी से विकसित की जा रही है ताकि भारत स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों का प्रमुख उत्पादन केंद्र बन सके।
2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और टिकाऊ विकास मॉडल के जरिए भारत पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भारत आने वाले वर्षों में बड़े अवसर उपलब्ध कराएगा।
2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
PM Modi ने परमाणु ऊर्जा को भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा का अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने इस दौरान Australia के विशाल यूरेनियम भंडार और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उसकी विशेषज्ञता का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया का अनुभव और संसाधन भारत की न्यूक्लियर एनर्जी महत्वाकांक्षाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर में दीर्घकालिक निवेश का दिया न्योता
प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लंबे समय तक निवेश करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत में बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे नेटवर्क, राष्ट्रीय राजमार्गों और शहरी विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में विदेशी निवेश के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की विशाल अर्थव्यवस्था और ऑस्ट्रेलिया की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी साबित होगी।
कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर
India-Australia Partnership: प्रधानमंत्री Modi ने अपने संबोधन में उन क्षेत्रों का भी उल्लेख किया जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर नई संभावनाएं तलाश सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, एविएशन, लॉजिस्टिक्स, एडवांस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिनटेक, फूड प्रोसेसिंग और डिजिटल इकोनॉमी जैसे सेक्टर दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की पूंजी, अत्याधुनिक तकनीक और प्राकृतिक संसाधन भारत के विकास को नई गति दे सकते हैं, जबकि भारत का विशाल बाजार और तेज आर्थिक विस्तार ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा।
CECA समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की अपील
मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम में PM Modi ने 200 से अधिक प्रमुख ऑस्ट्रेलियाई उद्योगपतियों और बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर समान सोच और मजबूत जनसंपर्क को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव बताया।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2022 में लागू हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के पूरा होने से व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे तथा आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।
रेयर अर्थ्स, EV और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त निवेश का सुझाव
प्रधानमंत्री ने रेयर अर्थ्स, लिथियम, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त निवेश बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकों और रणनीतिक संसाधनों के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बना सकते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों और ऑस्ट्रेलिया के प्रांतों के बीच प्रत्यक्ष सहयोग बढ़ाने का सुझाव भी दिया। उनका मानना है कि राज्य और प्रांतीय स्तर पर साझेदारी बढ़ने से निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी तथा दोनों देशों के आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।