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E20 Fuel Controversy: नए ईंधन पर विवाद, वाहन मालिकों की बढ़ी चिंता

 08 Jul 2026

E20 Fuel Controversy: देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर केंद्र सरकार इसे स्वच्छ ईंधन और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर इसके प्रभाव को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने अब सीधे जनता और वाहन निर्माताओं से संवाद करने का फैसला किया है। 


केजरीवाल ने घोषणा की है कि वह गुरुवार को पेट्रोल पंपों और सर्विस सेंटरों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे वाहन चालकों से मुलाकात कर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनके अनुभव जानेंगे। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर वास्तविक स्थिति समझने के लिए सबसे जरूरी है कि उन लोगों की राय सुनी जाए जो रोजाना अपनी गाड़ियों में यह ईंधन इस्तेमाल कर रहे हैं।

E20 Fuel Controversy: 29 वाहन कंपनियों को भेजे गए पत्र

Arvind Kejriwal Letter: Arvind Kejriwal ने बताया कि उन्होंने कुल 29 वाहन निर्माता कंपनियों को पत्र लिखकर E20 पेट्रोल के संबंध में कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। इनमें से तीन कंपनियां मारुति, टोयोटा और हीरो को अलग से पत्र भेजा गया है, जबकि बाकी 26 कंपनियों को एक अलग पत्र भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि इन तीन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पहले सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह दावा किया था कि E20 पेट्रोल से वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता और अधिकतम 3 से 4 प्रतिशत तक ही माइलेज में कमी आती है। इसी आधार पर उनसे पूछा गया है कि यदि किसी उपभोक्ता की गाड़ी में 10 से 15 प्रतिशत तक माइलेज घट जाता है या इंजन को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचता है, तो क्या संबंधित कंपनी इसकी जिम्मेदारी लेते हुए ग्राहक को मुआवजा देगी।

बाकी कंपनियों से भी मांगी स्पष्ट जानकारी

E20 Fuel Controversy के बीच Kejriwal ने बताया कि अन्य 26 वाहन निर्माता कंपनियों से भी यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या उनके पुराने और नए मॉडल E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। साथ ही उनसे पूछा गया है कि यदि E20 के इस्तेमाल से किसी वाहन की माइलेज कम होती है या इंजन एवं अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और उपभोक्ताओं को किस प्रकार का मुआवजा मिलेगा। उनका कहना है कि इस विषय पर स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है ताकि वाहन मालिक किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति में न रहें।

जनता से सीधे संवाद करेंगे केजरीवाल 

E20 Petrol Row: Kejriwal का कहना है कि किसी भी नीति का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए केवल सरकारी दावों या कंपनियों के बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं है। इसी सोच के तहत वे पेट्रोल पंपों और सर्विस सेंटरों पर जाकर वाहन चालकों से बातचीत करेंगे। 

इस दौरान वे यह जानने का प्रयास करेंगे कि E20 पेट्रोल भरवाने के बाद लोगों को माइलेज, इंजन की परफॉर्मेंस या वाहन की मेंटेनेंस से जुड़ी किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ा है या नहीं। उनके अनुसार, आम लोगों के अनुभव इस पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।

क्या है E20 पेट्रोल और क्यों उठ रहे हैं सवाल? 

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का उद्देश्य एथनॉल मिश्रण बढ़ाकर प्रदूषण कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना है। 

हालांकि, विवाद मुख्य रूप से उन वाहनों को लेकर है जिनका निर्माण वर्ष 2023 से पहले हुआ था। माना जाता है कि ऐसे अधिकांश वाहन E10 यानी 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को ध्यान में रखकर तैयार किए गए थे। ऐसे में E20 के इस्तेमाल को लेकर कई वाहन मालिकों ने चिंता जताई है।

कुछ उपभोक्ताओं का दावा है कि E20 पेट्रोल भरवाने के बाद उनकी गाड़ियों की माइलेज पहले की तुलना में 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो गई है। यानी एक लीटर पेट्रोल में वाहन पहले जितनी दूरी तय नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोगों ने यह आशंका भी जताई है कि अधिक एथनॉल होने के कारण समय के साथ रबर से बने कुछ पार्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।

ARAI रिपोर्ट का भी हो रहा है जिक्र

E20 पेट्रोल पर चल रही बहस के दौरान Automotive Research Association of India (ARAI) की एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में अधिक एथनॉल मिश्रित ईंधन से रबर के कुछ पुर्जों पर असर पड़ने की बात कही गई है। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है। ऐसे में इसकी विस्तृत जानकारी और निष्कर्ष आधिकारिक तौर पर उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण इस विषय पर अलग-अलग दावे और चर्चाएं जारी हैं।

सरकार ने अफवाहों को किया खारिज 

दूसरी ओर E20 Fuel Controversy के बीच केंद्र सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रही आशंकाओं को निराधार बताया है। केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने मंगलवार को कहा कि E20 ईंधन को लेकर कई तरह की गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि एथनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल के कारण किसी कार में बड़ी तकनीकी खराबी हुई हो।

सरकार का कहना है कि E20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसे लेकर लगातार परीक्षण और निगरानी की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और कुछ वाहन मालिक इस विषय पर अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में वाहन कंपनियों के जवाब और जनता की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।