PM Modi Diplomacy: भारत इन दिनों मुस्लिम बहुल देशों के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देने में जुटा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री
Dr. S. Jaishankar अलग-अलग मोर्चों पर सक्रिय हैं और दोनों के प्रयासों से भारत की विदेश नीति को एक नया विस्तार मिल रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री Modi इंडोनेशिया की यात्रा पर हैं, वहीं विदेश मंत्री Jaishankar खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार और ऊर्जा सहयोग बढ़ाना तथा सुरक्षा संबंधों को और गहरा करना है।
भारत की यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर बदलते समीकरणों के बीच कई देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत ने सभी पक्षों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश की है।
PM Modi Diplomacy: मोदी-जयशंकर की कूटनीति से मजबूत विदेश नीति
India Global Relations
: प्रधानमंत्री Modi और विदेश मंत्री Jaishankar को भारत की मौजूदा विदेश नीति के प्रमुख चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है।
PM मोदी जहां बड़े स्तर पर रणनीतिक रिश्तों और दीर्घकालिक साझेदारियों की नींव रखते हैं, वहीं Jaishankar कूटनीतिक स्तर पर इन संबंधों को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।
प्रधानमंत्री Modi इस समय तीन देशों की यात्रा पर हैं, जबकि विदेश मंत्री Jaishankar छह देशों के दौरे पर हैं। जयशंकर की यात्रा में कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान जैसे खाड़ी देश शामिल हैं, जो भारत के लिए ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। वहीं प्रधानमंत्री Modi इंडोनेशिया पहुंचे हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है।
इंडोनेशिया के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा
प्रधानमंत्री Modi की इंडोनेशिया यात्रा भारत की ‘Act East Policy’ के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और इंडोनेशिया ने वर्ष 2018 में अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। अब दोनों देश इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।
इंडोनेशिया आसियान क्षेत्र का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसकी भूमिका काफी अहम है। PM Modi Diplomacy के तहत भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार मजबूत किया जा रहा है। दोनों देशों का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत का संतुलन
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद भारत ने अपनी कूटनीतिक नीति में संतुलन बनाए रखा है। भारत के संबंध इजराइल के साथ भी मजबूत हैं और दूसरी तरफ कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात जैसे अरब देशों के साथ भी भारत के रिश्ते लगातार बेहतर हुए हैं।
भारत ने यह दिखाने की कोशिश की है कि उसके संबंध किसी धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि आपसी हितों, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक जरूरतों पर आधारित हैं। संकट के दौर में भी भारत ने क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ संवाद बनाए रखा और अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।
खाड़ी देशों में जयशंकर की सक्रिय कूटनीति
S. Jaishankar Outreach
: विदेश मंत्री S. Jaishankar का खाड़ी दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तेजी से राजनीतिक बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al-Thani से मुलाकात की। इस बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, संपर्क व्यवस्था और सुरक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने कतर में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए वहां की सरकार का धन्यवाद भी किया। भारत और कतर के बीच लंबे समय से ऊर्जा और आर्थिक क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं।
कतर के बाद जयशंकर बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्रा करेंगे। इन देशों के साथ भारत के संबंधों में ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक प्रभाव
कतर और ओमान ने अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष कम करने के प्रयासों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। ऐसे समय में भारत का खाड़ी देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना उसकी कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
जयशंकर खाड़ी देशों की यात्रा के बाद 13 जुलाई को न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह बेल्जियम जाकर अपने समकक्षों के साथ बातचीत करेंगे।
कुल मिलाकर भारत की मौजूदा विदेश नीति का फोकस अधिक देशों के साथ मजबूत साझेदारी बनाने पर है। PM Modi Diplomacy के तहत खाड़ी देशों से लेकर इंडोनेशिया तक भारत व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के जरिए अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।