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राज्यसभा उपचुनाव: भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी की संभावना।
07 Jul 2026
राज्यसभा उपचुनाव का महत्व
राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव से भाजपा और NDA के लिए संसद में मजबूती की संभावना बढ़ गई है। मतदान 24 जुलाई को होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। इस चुनाव के बाद भाजपा की सीटों की संख्या 117 तक पहुंच जाएगी, जबकि राजग की कुल संख्या 145 हो जाएगी।
इस बढ़त से केंद्र सरकार को महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दो तिहाई बहुमत हासिल करने में मदद मिल सकती है। यह बहुमत न केवल विधेयकों को पारित करने में सरलता लाएगा, बल्कि भाजपा के राजनीतिक भविष्य को भी सशक्त करेगा।
तृणमूल कांग्रेस में टूट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद, तृणमूल कांग्रेस में काफी टूट देखी गई है। लोकसभा में 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की है, और विधानसभा में अलग गुट ने नया नेता चुना है। हालांकि राज्यसभा में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन पार्टी के तीन सांसदों ने इस्तीफा दे दिया था।
अब इन तीन सीटों के लिए उपचुनाव होने जा रहे हैं। चूंकि प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग चुनाव होना है, इसीलिए भाजपा को निर्विरोध जीतने का भी अवसर मिल सकता है।
भाजपा की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, भाजपा तृणमूल कांग्रेस के तीन पूर्व नेताओं को पार्टी में शामिल कर उन्हें उपचुनाव में टिकट दे सकती है। इन नेताओं में सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बरिक शामिल हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इन नेताओं को पार्टी में शामिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी, क्योंकि राज्य में इनका विरोध कम है।
इन तीन सीटों के बाद, भाजपा की उच्च सदन में संख्या बढ़ जाएगी, जिससे सरकार को महिला आरक्षण जैसे विधेयकों को पेश करने में सहूलियत मिलेगी। अगले महीने के अंत में होने वाले मॉनसून सत्र के दौरान यह स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
सीटों के गणित का विश्लेषण
राज्यसभा की चुनाव प्रणाली के अनुसार, तीन सीटों के लिए जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को लगभग 70 'प्रथम वरीयता' मतों की आवश्यकता होगी। भाजपा यदि तीन उम्मीदवार उतारती है, तो उसके विधायक पार्टी निर्देश के अनुसार मतदान करने पर आसानी से आवश्यक संख्या प्राप्त कर सकते हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की संख्या अब लगभग 80 है, लेकिन पार्टी के भीतर की कलह के कारण एकजुटता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे भाजपा को लाभ मिलने की संभावना है।
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