Shyama Prasad Mukherjee: भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात राष्ट्रवादी नेता
Dr. Shyama Prasad Mukherjee की 125वीं जयंती के अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी उन्हें नमन करते हुए एक विस्तृत लेख लिखा, जिसमें उन्होंने मुखर्जी के जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को विस्तार से याद किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक ऐसे राष्ट्र निर्माता के रूप में वर्णित किया जिनका पूरा जीवन भारत की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए समर्पित रहा।
Shyama Prasad Mukherjee: राष्ट्र निर्माण में समर्पित जीवन
Narendra Modi Tribute
: अपने लेख में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि Dr. Mukherjee का जीवन विद्वता, साहस और देशभक्ति का अद्भुत संगम था। उन्होंने लिखा कि इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनका अंतिम बलिदान केवल व्यक्तिगत या राजनीतिक नहीं रहता, बल्कि वह राष्ट्र की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बन जाता है।
Dr. Mukherjee की यात्रा भी उन्हीं प्रेरणादायक क्षणों में शामिल है। PM Modi ने कहा कि Dr. Mukherjee के जीवन का सबसे प्रमुख आदर्श भारत की अखंडता था। उन्होंने अपने पूरे जीवन में देश की एकता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
अनुच्छेद 370 और 35A पर विशेष टिप्पणी
Mukherjee Birth Anniversary: प्रधानमंत्री ने अपने लेख में जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 और 35A को हटाए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी लंबे समय से इन प्रावधानों का विरोध करते रहे थे और इसे राष्ट्रीय एकता के लिए बाधा मानते थे। PM Modi के अनुसार, वर्ष 2019 में इन प्रावधानों को समाप्त करना Dr. Mukherjee के विचारों और उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि देने जैसा है।
उन्होंने यह भी कहा कि 6 जुलाई का दिन उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो राष्ट्रवाद, सेवा और एकता के मूल्यों में विश्वास रखते हैं।
शिक्षा और प्रशासन में योगदान
प्रधानमंत्री Modi ने Dr. Mukherjee को एक दूरदर्शी शिक्षाविद और प्रशासनिक सुधारक भी बताया गया। उन्होंने याद दिलाया कि वे सबसे कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने, शोध को प्रोत्साहित करने, पुस्तकालयों के विकास और छात्र कल्याण पर विशेष ध्यान दिया।
पीएम मोदी ने उनके विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाने वाले कर्मचारी तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे नागरिक बनाना है जो नेतृत्व कर सकें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
औद्योगिक विकास में भूमिका
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में Dr. Shyama Prasad Mukherjee के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके नेतृत्व में दामोदर घाटी निगम और सिंदरी उर्वरक संयंत्र जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव रखी गई, जिसने भारत के औद्योगिक विकास को दिशा दी।
इसके साथ ही उन्होंने हथकरघा, कुटीर उद्योगों और कारीगरों को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों की भी सराहना की। पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सरकार ने सिंदरी उर्वरक संयंत्र को पुनः शुरू कर डॉ. मुखर्जी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
राजनीतिक जीवन और सिद्धांतों की मजबूती
प्रधानमंत्री Modi ने Dr. Mukherjee के राजनीतिक जीवन को सिद्धांतों पर आधारित बताया। उन्होंने लिखा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद वे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल का हिस्सा बने क्योंकि उनका मानना था कि राष्ट्र निर्माण के लिए संवाद और सहयोग आवश्यक है।
हालांकि, जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय हितों से समझौता हो रहा है, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाता है।
अभिव्यक्ति और लोकतंत्र पर दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री ने प्रथम संविधान संशोधन के समय Dr. Shyama Prasad Mukherjee द्वारा उठाई गई चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंधों के खिलाफ थे। बाद के वर्षों में लोकतांत्रिक व्यवस्था में आए बदलावों ने उनकी आशंकाओं को काफी हद तक सही साबित किया।
मानवीय पक्ष और सामाजिक योगदान
PM Modi ने Dr. Mukherjee के मानवीय कार्यों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1943 के बंगाल अकाल और 1942 के मेदिनीपुर चक्रवात के दौरान उन्होंने राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। यह दर्शाता है कि वे केवल राजनीतिक नेता नहीं बल्कि समाज सेवा के प्रति भी उतने ही समर्पित थे।
युवाओं के लिए संदेश
अपने लेख के अंत में प्रधानमंत्री Modi ने Dr. Mukherjee के उस संदेश को याद किया जो उन्होंने युवाओं को दिया था। उन्होंने कहा था कि कोई भी कार्य पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए और उसे अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।
PM Modi
ने कहा कि Dr. Mukherjee को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब भारत एक मजबूत, आत्मनिर्भर, एकजुट और संवेदनशील राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि देश के युवा इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।