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Ayodhya Ram Mandir: फंड विवाद पर सियासी घमासान और बयानबाजी तेज हुई

 06 Jul 2026

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए फंड में कथित अनियमितताओं को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। इस मुद्दे पर RSS के महासचिव Dattatreya Hosabale के बयान के बाद विवाद और तेज हो गया। उन्होंने जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन इसी बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने RSS की भूमिका और उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कर्नाटक के मंत्री Priyank Kharge ने इस पूरे मामले पर RSS नेतृत्व को सीधे निशाने पर लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।


Ayodhya Ram Mandir: प्रियांक खरगे का RSS पर हमला, उठाए नैतिकता पर सवाल

Ram Mandir Scamकलबुर्गी में मीडिया से बातचीत करते हुए Priyank Kharge ने कहा कि जब राम मंदिर फंड से जुड़ी अनियमितताओं की बात सामने आई है, तो RSS को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने इस मामले में पहले कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस संगठन का देशभर में बड़ा सामाजिक प्रभाव है, वह ऐसे गंभीर मुद्दे पर इतनी देर से प्रतिक्रिया क्यों दे रहा है।

खरगे ने यह भी कहा कि किसी भी संस्था को दूसरों से जवाबदेही मांगने से पहले अपनी खुद की जवाबदेही तय करनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि फंड संग्रह में गड़बड़ी हुई है तो यह केवल बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक व्यवस्था की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग सजा की मांग कर रहे हैं, उनकी अपनी नैतिक स्थिति क्या है? उन्होंने RSS नेतृत्व की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है।

आंतरिक मिलीभगत की आशंका और फंड पर सवाल

Priyank Kharge ने आगे यह भी संकेत दिया कि इस विवाद में केवल बाहरी गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि Ayodhya Ram Mandir से जुड़े संगठन के भीतर भी कुछ स्तर पर मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह से फंड के उपयोग और संग्रह को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, उससे कई तरह की आशंकाएं पैदा होती हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह के बड़े फंड मैनेजमेंट में यह देखना जरूरी है कि धन कहां और कैसे पहुंचा। हालांकि उन्होंने इसे प्रत्यक्ष आरोप के बजाय एक संभावित स्थिति के रूप में पेश किया। खरगे ने कहा कि ऐसे मामलों में देरी से की गई प्रतिक्रिया कई संदेहों को जन्म देती है और इससे जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले का बयान 

इस पूरे विवाद पर RSS महासचिव Dattatreya Hosabale ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से आग्रह किया कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए इसे एक असाधारण मामला माना जाए और वित्तीय प्रबंधन तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार किए जाएं।

होसबोले ने यह भी कहा कि लाखों राम भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि ट्रस्ट पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करे, ताकि लोगों का विश्वास मजबूत बना रहे। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि ट्रस्ट भविष्य में अपनी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

कांग्रेस सांसद मल्लू रवि का बयान और CSS पर जोर

इस मुद्दे के बीच कांग्रेस सांसद Mallu Ravi ने भी Ayodhya Ram Mandir मामले से जुड़े संदर्भ में RSS की आलोचना की और राजनीतिक विमर्श को एक नई दिशा देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक और जातीय आधार पर विभाजन की स्थिति बढ़ रही है और इसके पीछे RSS की भूमिका पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने दावा किया कि RSS भारतीय जनता पार्टी को चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए काम करता है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के स्वयंसेवक संगठन 'कांग्रेस स्वयंसेवक संघ' (CSS) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संगठन आजादी के आंदोलन से जुड़ा हुआ है और इसका उद्देश्य सत्ता नहीं बल्कि देश सेवा रहा है। Mallu Ravi ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में CSS को और अधिक सक्रिय और मजबूत बनाने की आवश्यकता है, क्योंकि समाज सेवा और राष्ट्रीय निर्माण में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

बढ़ते विवाद के बीच सियासी माहौल गरमाया 

Ayodhya Political Rowराम मंदिर फंड को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। एक तरफ RSS जहां जांच और पारदर्शिता की बात कर रहा है, वहीं विपक्षी दल संगठन की भूमिका, उसकी देरी से प्रतिक्रिया और नैतिक अधिकार को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

यह मामला अब केवल फंड अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बयानबाजी और संगठनात्मक जवाबदेही की बहस में बदल चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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