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Devendra Fadnavis ने RTI नियमों में बदलाव पर लगाई रोक, बड़ा फैसला

 03 Jul 2026

Devendra Fadnavis, RTI: सूचना का अधिकार (RTI) कानून से जुड़े नए नियमों को लेकर महाराष्ट्र में बढ़े विवाद के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता Anna Hazare की ओर से 5 जुलाई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से पहले मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने RTI नियमों में किए गए विवादित संशोधनों पर फिलहाल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त को हाल ही में अधिसूचित किए गए नए नियमों के अमल पर रोक लगाने को कहा है। 


सरकार के इस फैसले को Anna Hazare के लगातार बढ़ते विरोध और जनदबाव के बीच उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पिछले कई दिनों से हजारे इन संशोधनों का विरोध कर रहे थे और उनका कहना था कि नए नियम सूचना पाने के नागरिकों के अधिकार को सीमित कर देंगे।

Devendra Fadnavis, RTI: 5 जुलाई से भूख हड़ताल की दी थी चेतावनी 

Anna Hazare ProtestAnna Hazare ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि यदि महाराष्ट्र सरकार RTI नियमों में किए गए संशोधनों को वापस नहीं लेती है तो वे 5 जुलाई से अहमदनगर (अहिल्यानगर) जिले के अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

उन्होंने सरकार को भेजे गए अपने पत्र में स्पष्ट किया था कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही का सबसे प्रभावी माध्यम है। ऐसे में यदि इस कानून की प्रक्रिया को जटिल बनाया जाएगा तो आम नागरिकों के लिए सरकारी जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा। हजारे ने यह भी कहा था कि सरकार को इन नियमों को लागू करने से पहले विभिन्न पक्षों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

नए नियमों पर अन्ना हजारे की आपत्तियां 

Maharashtra RTI RulesAnna Hazare का कहना है कि RTI नियमों में किए गए संशोधन कानून की मूल भावना के खिलाफ हैं। उनके अनुसार नए प्रावधानों से सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक कठिन, महंगी और जटिल हो जाएगी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि नए नियमों के कारण आवेदन करने की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं पैदा होंगी। इससे लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा और अपील की प्रक्रिया भी पहले से अधिक पेचीदा हो जाएगी। उनका मानना है कि इससे सरकारी विभागों की जवाबदेही कमजोर होगी और सूचना का अधिकार प्रभावहीन बन सकता है।

हजारे ने सरकार से मांग की कि वर्तमान संशोधनों को तत्काल निरस्त किया जाए और नए नियम तैयार करने से पहले सूचना आयुक्तों, RTI विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा आम नागरिकों से विस्तृत चर्चा की जाए।

क्या थे RTI नियमों में प्रस्तावित बदलाव? 

महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना 12 जून को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित की गई थी। अधिसूचना के अनुसार नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए गए थे। इन संशोधनों में सबसे अधिक चर्चा आवेदन शुल्क को लेकर हुई। नए नियमों के तहत सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत आवेदन करने वाले प्रत्येक आवेदक के लिए 730 रुपये का आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया था।

इसके अलावा यह भी तय किया गया कि एक RTI आवेदन में केवल एक ही विषय से संबंधित जानकारी मांगी जा सकेगी। यदि कोई आवेदक एक से अधिक विषयों पर जानकारी मांगता है तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी (PIO) केवल पहले विषय पर ही कार्रवाई करेगा। अन्य विषयों के लिए अलग-अलग आवेदन करने की सलाह दी जाएगी।

आवेदन की शब्द सीमा भी तय 

नए नियमों में आवेदन की लंबाई को भी सीमित किया गया था। इसके तहत RTI आवेदन में अधिकतम 150 शब्द लिखने का प्रावधान रखा गया। सरकार का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना बताया गया, लेकिन इस प्रावधान पर भी सवाल उठे। इसी मुद्दे पर Devendra Fadnavis, RTI को लेकर भी चर्चा हुई कि क्या इस तरह की सीमा व्यवहारिक है या नहीं। आलोचकों का कहना था कि कई मामलों में विस्तृत जानकारी मांगने के लिए आवेदन में अधिक विवरण देना जरूरी होता है। ऐसे में शब्द सीमा तय होने से कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रभावी ढंग से नहीं मांगी जा सकेंगी।

सरकार के फैसले से फिलहाल टला विवाद 

Anna Hazare के आंदोलन की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विवादित नियमों पर रोक लगाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के निर्देश के बाद फिलहाल इन संशोधनों का क्रियान्वयन स्थगित कर दिया गया है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नियमों को पूरी तरह वापस लिया जाएगा या उनमें संशोधन कर दोबारा लागू किया जाएगा। फिलहाल इतना तय है कि नए RTI नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सरकार और विभिन्न पक्षों के बीच आगे होने वाली चर्चा पर निर्भर करेगा।

सरकार के इस फैसले के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि Anna Hazare अपनी प्रस्तावित भूख हड़ताल जारी रखते हैं या सरकार के अगले कदम का इंतजार करते हैं। वहीं RTI से जुड़े विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का भी मानना है कि सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून में किसी भी बदलाव से पहले व्यापक जनपरामर्श और सभी संबंधित पक्षों की राय लेना आवश्यक है, ताकि कानून की मूल भावना और नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

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