Ayodhya Donation Scam : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और गबन के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। जांच एजेंसियां इस बात की तहकीकात में जुटी हैं कि दान पात्र खोलने, नकदी की गिनती, उसका रिकॉर्ड तैयार करने और अंततः बैंक में जमा कराने की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और दोषियों की भूमिका स्पष्ट होने पर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
Ayodhya Donation Theft: ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मांगी गई जानकारी
Ram Temple Trust: जांच अब केवल गिरफ्तार कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली तक पहुंच चुकी है। अयोध्या पुलिस ने ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai और ट्रस्टी डॉक्टर Anil Mishra से उन कर्मचारियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है, जिन्हें इस पूरी व्यवस्था में नियुक्त किया गया था।
पुलिस ने खास तौर पर यह जानकारी मांगी है कि किन लोगों को चढ़ावे की गणना, नकदी प्रबंधन और बैंक तक धन पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनकी निगरानी किस स्तर पर होती थी और उनके काम की समीक्षा कैसे की जाती थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन बिंदुओं से पूरे नेटवर्क की कार्यशैली और संभावित जिम्मेदारियों का स्पष्ट चित्र सामने आ सकता है।
अब तक 8 गिरफ्तारियां, पूछताछ जारी
Temple Donation Scam: इस मामले में पुलिस अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। जांच अधिकारी लगातार उनसे पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चढ़ावे की प्रक्रिया में कहां चूक हुई और किन लोगों की भूमिका संदिग्ध है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में एक और संदिग्ध की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी आगे की जांच में महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ने में मदद करेगी।
जेल में आरोपी से लंबी पूछताछ, नए इनपुट मिले
अदालत से अनुमति मिलने के बाद पुलिस टीम ने जेल में बंद आरोपी Avinash Shukla से भी विस्तृत पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान पुलिस ने विशेष रूप से दान राशि की गिनती, नकदी के रखरखाव और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में शामिल निजी एजेंसियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल किए।
सूत्रों का कहना है कि इस पूछताछ में कुछ नए इनपुट सामने आए हैं, जिनके आधार पर अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है। पुलिस अब इन सभी पहलुओं को जोड़कर पूरे मामले की कड़ी-दर-कड़ी जांच कर रही है।
400 निजी सुरक्षाकर्मी भी जांच के घेरे में
जांच अब केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि
Ayodhya Donation Scam मामले में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था भी इसके दायरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार, करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, उनकी ड्यूटी और कार्यप्रणाली की भी जांच की जा रही है।
इन सुरक्षाकर्मियों को मंदिर परिसर के मुख्य द्वार, निकास द्वार, दर्शन पथ और चढ़ावे के आवागमन वाले मार्गों पर तैनात किया गया था। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या इन संवेदनशील स्थानों पर ड्यूटी के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या कहीं किसी स्तर पर लापरवाही हुई।
ट्रस्ट व्यवस्था में बदलाव की संभावना
मामले के उजागर होने के बाद ट्रस्ट भी अपनी मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने में जुट गया है। सूत्रों के मुताबिक, नकदी से जुड़े कार्यों में लगे कुछ अनौपचारिक कर्मचारियों को हटाकर उन्हें गैर-नकदी कार्यों में स्थानांतरित करने पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा दान प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की योजना पर भी चर्चा चल रही है। ट्रस्ट का फोकस अब ऐसी व्यवस्था बनाने पर है जिसमें चढ़ावे की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और निगरानी योग्य हो सके।
जिम्मेदारी तय करने पर फोकस, आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस बात पर केंद्रित हैं कि पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई और किसकी जिम्मेदारी बनती है। दान पात्र खोलने से लेकर बैंक में राशि जमा कराने तक हर चरण की बारीकी से जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है
कुल मिलाकर यह मामला अब केवल कथित चोरी या गबन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Ayodhya Donation Scam
के तहत पूरे दान प्रबंधन तंत्र, निगरानी प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और नई गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
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