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Shiv Sena: नया राजनीतिक कदम, समर्थकों और विरोधियों की बढ़ी नजरें

 30 Jun 2026

Shiv Senaमहाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शिवसेना (UBT) को उस समय बड़ा झटका लगा जब Aditya Thackeray के करीबी माने जाने वाले और विधान परिषद सदस्य Sachin Ahir ने पाला बदलते हुए Eknath Shinde गुट की शिवसेना का दामन थाम लिया। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब राज्य की राजनीतिक हलचल पहले से ही तेज बनी हुई है। Sachin Ahir के Shinde गुट में शामिल होने के तुरंत बाद उन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार भी बनाया गया और उन्होंने औपचारिक रूप से अपना नामांकन दाखिल कर दिया।


Shiv Sena: नामांकन के समय दिखा बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन

Mahayuti Council Nominationनामांकन दाखिल करने के दौरान राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी साफ नजर आया। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis, उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde, और Sunetra Pawar मौजूद रहीं। इसके अलावा शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री भी इस दौरान उपस्थित थे, जिनमें Chandrakant Patil का नाम भी शामिल रहा। इस पूरे घटनाक्रम को महायुति गठबंधन की एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें विपक्षी खेमे को लगातार कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं।

‘ऑपरेशन टाइगर-3’ की चर्चा तेज 

Eknath Shinde Factionराजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को ‘ऑपरेशन टाइगर-3’ के नाम से जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह Shinde गुट की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत शिवसेना (UBT) के और नेताओं को अपने खेमे में लाने की कोशिश की जा रही है। Shinde गुट के नेताओं का दावा है कि यह शुरुआत मात्र है और आने वाले समय में Uddhav Thackeray गुट के कई और विधायक भी उनके साथ जुड़ सकते हैं। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समय में और अधिक उथल-पुथल की संभावना जताई जा रही है।

सचिन अहीर का राजनीतिक सफर 

Sachin Ahir महाराष्ट्र की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। वे मुंबई की शिवड़ी और वर्ली विधानसभा सीट से तीन बार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक रह चुके हैं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने राज्य सरकार में गृह निर्माण राज्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है। 2019 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने एनसीपी छोड़कर तत्कालीन अविभाजित Shiv Sena का दामन थामा था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें विधान परिषद की सदस्यता दी थी।

आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाते थे अहीर 

Sachin Ahir को Aditya Thackeray के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता था। खासकर 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने वर्ली सीट पर Aditya Thackeray के चुनाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। माना जाता है कि उनकी रणनीतिक और संगठनात्मक भूमिका के कारण ही आदित्य ठाकरे को वर्ली में बड़ी जीत हासिल हुई थी। इसी कारण उनके शिंदे गुट में जाने को Shiv Sena (UBT) के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

वर्ली में राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Sachin Ahir को विधान परिषद के उपसभापति पद के उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाना केवल एक पद की राजनीति नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्ली विधानसभा क्षेत्र को लेकर भी रणनीति छिपी हुई है। वर्ली, Aditya Thackeray का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। ऐसे में अहीर का Shinde गुट में शामिल होना इस क्षेत्र में भविष्य की राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। माना जा रहा है कि शिंदे गुट आने वाले वर्षों में वर्ली में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

भविष्य में संभावित चुनावी टकराव की संभावना

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि परिस्थितियां इसी तरह बदलती रहीं तो 2029 के विधानसभा चुनाव में वर्ली सीट पर Aditya Thackeray और Sachin Ahir के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस तरह की किसी भी संभावना पर अभी किसी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

शिंदे गुट का दावा: और भी बदलाव होंगे 

Shinde गुट के नेताओं ने इस घटनाक्रम को अपने लिए एक बड़ी राजनीतिक सफलता बताया है। विधायक Mahendra Dalvi ने इसे Aditya Thackeray के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि महायुति का ‘ऑपरेशन टाइगर-3’ अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में Uddhav Thackeray गुट के कई और विधायक भी शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।

Sachin Ahir का Shinde गुट में शामिल होना महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे न केवल Shiv Sena (UBT) की आंतरिक स्थिति पर असर पड़ेगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा भी प्रभावित हो सकती है। यह घटनाक्रम महायुति और विपक्षी गठबंधन के बीच जारी शक्ति संघर्ष को और अधिक तीव्र करता नजर आ रहा है।

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