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Bhagwant Mann Akal तख्त विवाद में SGPC चुनाव की मांग फिर दोहराई

 24 Jun 2026

Bhagwant Mann Akalपंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann ने बठिंडा जिले के मंडी कलां गांव में आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने धार्मिक और राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर टिप्पणी की, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के चुनावों की मांग दोहराई और राज्य सरकार की नई योजनाओं तथा कानूनों का भी उल्लेख किया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे अकाल तख्त से जुड़े एक विवाद को लेकर चर्चा में हैं।


Bhagwant Mann Akal: अकाल तख्त और वीडियो विवाद पर पृष्ठभूमि 

Punjab Sikh Politicsहाल ही में एक वायरल वीडियो को लेकर अकाल तख्त द्वारा मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को कथित रूप से ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किए जाने का मामला सामने आया था। यह आदेश अकाल तख्त के जत्थेदार द्वारा इस दावे के बाद आया कि वीडियो में किसी तरह की छेड़छाड़ या एआई जनरेशन नहीं की गई है।

वीडियो में कथित तौर पर CM Mann जैसे दिखने वाले एक व्यक्ति को सिख गुरुओं और मारे गए आतंकवादी Jarnail Singh Bhindranwale की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल दिखाया गया था। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस वीडियो को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे उन्हें बदनाम करने की साजिश बताया था। इसी विवाद के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया और धार्मिक संगठनों तथा राजनीतिक हलकों में इस पर बहस तेज हो गई।

अकाल तख्त को सर्वोच्च बताते हुए उठाए सवाल 

Akal Takht Supremeअपने संबोधन में मुख्यमंत्री Mann ने कहा कि अकाल तख्त हर पंजाबी और सिख के लिए सर्वोच्च है और उन्होंने श्रद्धा के कारण ही वहां मत्था टेका था। लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग इस सम्मानित संस्था का उपयोग अपने निजी और राजनीतिक हितों के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना जरूरी है और इन्हें किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव से दूर रखा जाना चाहिए।

SGPC चुनाव कराने की मांग दोहराई 

CM Mann ने एक बार फिर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के चुनाव जल्द से जल्द कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि लगभग 14 साल पहले SGPC के चुनाव हुए थे और इतने लंबे समय तक चुनाव न होना उचित नहीं है। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन ऐसे लोगों के हाथों में नहीं रहना चाहिए जो उनके अनुसार राजनीतिक लाभ के लिए आस्था का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार पर निशाना

अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछली अकाली नेतृत्व ने धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया और राज्य में विभिन्न प्रकार के माफियाओं जैसे ड्रग्स, ट्रांसपोर्ट और रेत खनन को बढ़ावा दिया। 

CM Mann ने कहा कि इन नीतियों के कारण पंजाब और इसके लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने इसे राज्य की पिछली सरकारों की विफलता बताया और मौजूदा सरकार को सुधार की दिशा में काम करने वाली सरकार बताया।

नए बेअदबी कानून का उल्लेख 

मुख्यमंत्री ने हाल ही में लागू हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक बेअदबी की घटनाओं को रोकना और दोषियों को सख्त सजा देना है। उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। मान ने दावा किया कि यह कानून राज्य में धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

विकास कार्य और नई योजनाओं की घोषणा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंडी कलां गांव के लिए विकास कार्यों की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि गांव में 50 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी। इसके तहत एक नई लाइब्रेरी का निर्माण और 55 साल पुरानी धर्मशाला का नवीनीकरण किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का भी जिक्र किया।

1 जुलाई से शुरू होगी ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’

CM Mann ने घोषणा की कि 1 जुलाई से ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ लागू की जाएगी। इस योजना के तहत 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं अनुसूचित जाति के परिवारों की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी और इससे जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी।

बठिंडा में दिए गए इस बयान में मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने एक ओर धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और SGPC चुनावों पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर अपनी सरकार की नीतियों, कानूनों और विकास योजनाओं को भी सामने रखा। अकाल तख्त से जुड़े विवाद के बीच उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति और धार्मिक चर्चाओं को एक बार फिर से गरमा दिया है।

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