George Kurian Resigns: राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद बढ़ा दबाव
President Murmu Accepts: जानकारी के अनुसार, George Kurian का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। राज्यसभा सांसद के रूप में उनकी भूमिका समाप्त होते ही उनके केंद्रीय मंत्री पद पर बने रहने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रह गई थी।
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, केंद्र सरकार में मंत्री बने रहने के लिए संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना आवश्यक होता है। चूंकि उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका था, इसलिए उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देना उचित समझा, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया।
पहले से तय था राजनीतिक बदलाव का संकेत
सूत्रों और राजनीतिक घटनाक्रमों के अनुसार, BJP ने पहले ही यह संकेत दे दिया था कि George Kurian को दोबारा राज्यसभा भेजने की योजना नहीं है। उनकी जगह मध्य प्रदेश से पार्टी महासचिव Tarun Chugh को राज्यसभा के लिए नामित किया गया था।
इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि कुरियन जल्द ही मंत्रिपरिषद से बाहर हो सकते हैं। मंगलवार को उनका इस्तीफा इसी प्रक्रिया की औपचारिक परिणति माना जा रहा है।
मंत्रालय में निभा रहे थे अहम जिम्मेदारी
Minority Affairs Minister: George Kurian केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में भी राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। वे प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अगस्त 2024 से शामिल थे।
उन्होंने 9 जून 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी और 11 जून 2024 को अपने मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े कई प्रशासनिक कार्यों में भूमिका निभाई।
केरल चुनाव परिणाम और राजनीतिक असर
इस घटनाक्रम के पीछे केरल विधानसभा चुनाव के परिणामों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। George Kurian ने कंजीरापल्ली सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, और इसी संदर्भ में George Kurian Resigns को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। चुनाव में उनके प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर भी समीक्षा हुई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री
Alphons Kannanthanam के प्रदर्शन से भी कम समर्थन मिला था, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर मानी गई।
इसके बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि पार्टी उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं है, जिसका असर उनके मंत्री पद पर भी पड़ा।
लंबे राजनीतिक करियर का अंत नहीं, लेकिन बड़ा बदलाव
65 वर्षीय George Kurian केरल BJP के उन वरिष्ठ नेताओं में से हैं जो पार्टी की स्थापना से ही सक्रिय राजनीति में जुड़े रहे हैं। वे 1980 के दशक से BJP से जुड़े हैं और संगठन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभा चुके हैं।
वे Supreme Court में वकालत भी कर चुके हैं और कानूनी क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान रही है।
इसके अलावा वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री O. Rajagopal के विशेष कार्याधिकारी (OSD) भी रह चुके हैं।
उनका जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह नगर में पूरी की और बाद में कानून की पढ़ाई करते हुए स्नातक और परास्नातक की डिग्री हासिल की।
जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा एक प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक बदलाव का भी संकेत माना जा रहा है। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनका मंत्री पद छोड़ना औपचारिक रूप से जरूरी था, लेकिन इसके पीछे केरल चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन और संगठनात्मक रणनीति को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि BJP केरल में अपने संगठनात्मक ढांचे को किस तरह आगे बढ़ाती है और George Kurian Resigns के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका भविष्य में किस दिशा में जाती है।