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Ram Mandir Scam: दान व जमीन खरीद मामले में SIT जांच जारी, रिपोर्ट जल्द
22 Jun 2026
Ram Mandir Scam: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित गबन को लेकर चल रही जांच ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस पूरे मामले की जांच Special Investigation Team (SIT) कर रही है, जो पिछले कई दिनों से अयोध्या में सक्रिय थी। अब खबर है कि SIT अपनी प्रारंभिक Report सोमवार, 22 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को सौंप सकती है।
सूत्रों के अनुसार, SIT की टीम लगभग 6 दिनों तक अयोध्या में रहकर विभिन्न पहलुओं की गहन जांच कर चुकी है और इसके बाद शनिवार को लखनऊ लौट गई। इस दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बयान और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं, जिन्हें रिपोर्ट का आधार बनाया गया है।
Ram Mandir Scam: पूछताछ और प्रतिबंध, जांच के दायरे में कई लोग
Ayodhya Scam Case: जांच के दौरान SIT ने कई लोगों से पूछताछ की है और यह स्पष्ट किया गया है कि जिन व्यक्तियों से पूछताछ हुई है, उन्हें फिलहाल शहर छोड़ने की अनुमति नहीं है। उन्हें अगले आदेश तक वहीं रहने को कहा गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, जांच पूरी होने तक सभी संबंधित लोगों को सहयोग देने और आगे की पूछताछ के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
SIT ने संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर कुछ लोगों से दोबारा भी पूछताछ की जा सकती है। इस जांच में ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
71 एकड़ जमीन खरीद पर उठे सवाल
SIT की जांच में सबसे बड़ा फोकस ट्रस्ट द्वारा की गई जमीन की खरीद पर रहा है। जांच एजेंसी ने लगभग 71 एकड़ भूमि से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले हैं। आरोपों के अनुसार, यह जमीन कई चरणों में खरीदी गई और कुछ मामलों में बाजार मूल्य से 500% से 800% अधिक कीमत पर सौदे किए गए।
जांच के दौरान जमीन की खरीद प्रक्रिया, भुगतान के तरीके और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की गई। SIT यह भी जांच कर रही है कि इन लेनदेन में किसी तरह की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी हुई या नहीं, और इस पूरे मामले को लेकर CM Yogi Report में भी संबंधित तथ्यों और जांच की प्रगति का उल्लेख किए जाने की संभावना है।
150 संदिग्धों के नाम सामने, 25 पर कार्रवाई की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, SIT की 6 दिनों की जांच के दौरान लगभग 150 संदिग्ध व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इनमें से करीब 25 लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
जांच टीम ने मंदिर में आने वाले दान, नकदी के प्रबंधन, बैंक में जमा प्रक्रिया और लेखांकन प्रणाली की बारीकी से जांच की है। इसके अलावा CCTV फुटेज, दान पेटियों से मिलने वाली राशि और उसकी गिनती की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
साक्ष्य और बैंक रिकॉर्ड के साथ लखनऊ लौटी SIT
शनिवार को SIT टीम सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ लखनऊ लौट गई। टीम ने विभिन्न संदिग्धों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की है। जांच में यह भी सामने आया कि 2025 की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान दान प्रबंधन में कथित अनियमितताएं हुई थीं, जिनकी भी जांच की जा रही है।
इसके अलावा मंदिर के दान संग्रह, अनावश्यक खर्चों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों की भी विस्तृत समीक्षा की गई है। SIT ने 2021 तक के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले हैं।
2 करोड़ रुपये की वसूली और गवाहों के खुलासे
जांच में दान राशि की गिनती से जुड़े पांच व्यक्तियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुण और रामशंकर उर्फ टिन्नू के बयानों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन खुलासों के आधार पर अब तक लगभग 2 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
SIT का कहना है कि यह जांच केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जा रही है, जिसमें Ram Mandir Scam से जुड़े सभी वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की भी जांच शामिल है।
प्रारंभिक रिपोर्ट में सुधारों की सिफारिश
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की सिफारिशें शामिल हो सकती हैं। इसमें Kashi Vishwanath Dham की तर्ज पर एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे संचालन अधिक व्यवस्थित हो सके।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जाए और प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन किया जाए। इसके साथ ही दान राशि की साप्ताहिक ऑडिट प्रणाली लागू करने की बात भी कही गई है।
निगरानी और तकनीकी सुधार के सुझाव
SIT की रिपोर्ट में मंदिर प्रबंधन में तकनीकी सुधारों पर भी जोर दिया गया है। दान की दैनिक एंट्री प्रणाली लागू करने, CCTV डेटा स्टोरेज को 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने और ट्रस्ट संचालन में Supreme Court के निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा जांच एजेंसी ने मंदिर प्रबंधन के लिए पेशेवर प्रशासनिक मॉडल अपनाने की सलाह भी दी है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो सके।
जांच आगे भी जारी रहने के संकेत
हालांकि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है, लेकिन SIT ने संकेत दिया है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ सकती है। आने वाले दिनों में और गहन जांच और नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे मामले ने अयोध्या से लेकर राज्य स्तर तक प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है, और अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, जिसमें Ram Mandir Scam से जुड़े पहलुओं की भी जांच को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
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