Uddhav Thackeray Setback: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को तगड़ा झटका लगने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के लोकसभा के 6 सांसद आज सोमवार को दोपहर करीब 3 बजे Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने वाले हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब राज्य में विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है और राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं।
इन सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के साथ ही राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बताया जा रहा है कि इस कदम से शिंदे गुट को दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत भी प्राप्त हो सकता है, जिससे अयोग्यता की आशंका काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
Uddhav Thackeray Setback: ‘ऑपरेशन टाइगर’ से बढ़ी सियासी हलचल
Maharashtra Political Crisis: पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में जिस ‘Operation Tiger’ की चर्चा चल रही थी, वह अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इस कथित राजनीतिक अभियान ने शिवसेना (UBT) के भीतर असंतोष और टूट को और गहरा कर दिया है। इस घटनाक्रम के चलते उद्धव ठाकरे खेमे में चिंता का माहौल है, जबकि शिंदे गुट में आत्मविश्वास बढ़ा हुआ नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सफल रहा है और पार्टी की स्थिति मजबूत है।' वहीं उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख Eknath Shinde ने भी संकेत दिया कि यह राजनीतिक रणनीति उनके लिए सफल साबित हो रही है। शिंदे ने कहा कि जब भी वे कोई अभियान शुरू करते हैं, उसे पूरा करते हैं।
बागी सांसदों की सूची और अंदरूनी नाराजगी
Shiv Sena Rebellion: शिवसेना (UBT) के जिन 6 सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चा है, उनमें संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर के नाम शामिल हैं। ये सभी सांसद हाल ही में 17 जून को दिल्ली में हुई पार्टी की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिससे उनके असंतोष की अटकलें तेज हो गई थीं।
पार्टी के पास लोकसभा में कुल 9 सांसद हैं। ऐसे में यदि 6 सांसद अलग हो जाते हैं तो यह संख्या दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब या उसके बराबर पहुंच सकती है, जो दलबदल कानून के तहत महत्वपूर्ण माना जाता है।
नागेश पाटिल अष्टिकर का बयान और नाराजगी की वजह
हिंगोली से सांसद
Nagesh Patil Ashtikar ने अपने हालिया वीडियो संदेश में स्पष्ट किया कि उन्होंने और कुछ अन्य सांसदों ने 18 जून तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया था। उनके अनुसार, उस समय तक वे पार्टी छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। Uddhav Thackeray Setback के बीच उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस समय तक उनका रुख पार्टी के साथ बने रहने का था।
लेकिन अष्टिकर ने दावा किया कि 18 जून के बाद पार्टी के भीतर और उनके खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों ने उनके मन को बदल दिया। उन्होंने कहा कि गुरुवार के बाद जो बयान सामने आए, उनसे यह महसूस हुआ कि पार्टी में बने रहने का अब कोई मतलब नहीं रह गया है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी सीधे तौर पर Uddhav Thackeray या Sanjay Raut से नहीं है, लेकिन हालिया राजनीतिक बयानबाजी और माहौल ने उन्हें प्रभावित किया।
ओमप्रकाश राजे निंबालकर का अलग फैसला
इसी तरह धाराशिव के सांसद Omprakash Raje Nimbalkar ने भी अपने समर्थकों से बातचीत के बाद शिंदे गुट में शामिल होने का निर्णय लिया। बताया गया कि पार्टी ने उन्हें रोकने के लिए काफी प्रयास किए। इसके तहत विधायक Kailash Patil और Varun Sardesai को उनके घर पुणे भेजा गया था, जहां उन्होंने पार्टी नेतृत्व का संदेश भी पहुंचाया।
हालांकि इसके बावजूद निंबालकर ने अपने क्षेत्र के लोगों और समर्थकों से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया कि वे शिंदे गुट का हिस्सा बनेंगे।
शिवसेना (UBT) की रणनीतिक बैठक
इस पूरे घटनाक्रम के बीच
Uddhav Thackeray Setback के बाद ठाकरे गुट ने भी अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश की है। मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित पार्टी कार्यालय ‘Shivalaya’ में आज दोपहर 2:30 बजे सभी विधायकों और MLCs की अहम बैठक बुलाई गई है।
यह बैठक मानसून सत्र के पहले दिन हो रही है, जिसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में उद्धव ठाकरे खुद पार्टी के विधायकों और नेताओं को संबोधित कर सकते हैं और आगे की रणनीति तय की जाएगी। माना जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य पार्टी में बची हुई एकता को बनाए रखना और टूट को रोकना है।
राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव
यदि 6 सांसद वास्तव में शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ साबित होगा। इससे Uddhav Thackeray के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) की लोकसभा में ताकत कमजोर हो जाएगी, जबकि Eknath Shinde का गुट और अधिक मजबूत स्थिति में आ जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर अस्थिरता और नई रणनीतिक चालों का दौर शुरू कर दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
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