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Great Nicobar Project पर विवाद, पर्यावरणीय असर को लेकर सवाल उठे
19 Jun 2026
Great Nicobar Project: अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे महत्वाकांक्षी Great Nicobar Project पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव और पारिस्थितिक नुकसान की आशंकाएं पहले से ही उठती रही हैं, और अब कांग्रेस ने इसके विभिन्न पहलुओं को लेकर सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री Jairam Ramesh ने शुक्रवार को पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav को एक नया पत्र लिखकर इस परियोजना से जुड़ी कई प्रक्रियागत और पर्यावरणीय खामियों की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि इस परियोजना में पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) से जुड़ी शर्तों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है और महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
Great Nicobar Project: पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों पर सवाल
Environmental Impact Concerns: Jairam Ramesh ने अपने पत्र में दावा किया है कि 11 नवंबर 2022 को इस परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर Conservation and Mitigation Plan जमा करना अनिवार्य था। इन योजनाओं में वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India - WII) और Salim Ali Centre for Ornithology जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा तैयार किए जाने वाले दस्तावेज भी शामिल हैं।
हालांकि, रमेश के अनुसार ये महत्वपूर्ण प्लान अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के तहत जिन योजनाओं को समय पर जारी किया जाना चाहिए था, उन्हें लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। इससे परियोजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
अनुपालन रिपोर्ट और मॉनिटरिंग पर भी उठे सवाल
Project Transparency Questions: अपने पत्र में Jairam Ramesh ने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय नियमों के अनुसार हर छह महीने में Compliance Report सार्वजनिक की जानी चाहिए, लेकिन मार्च 2024 के बाद से ऐसी कोई रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि Project Monitoring Committee (PMC) की बैठकों के महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी कई महीनों की देरी से सार्वजनिक किया जा रहा है, जिससे निगरानी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है। रमेश का आरोप है कि जब नियमों के अनुसार रिपोर्ट और अपडेट समय पर जारी नहीं किए जाते, तो यह संदेह पैदा करता है कि परियोजना के वास्तविक प्रभावों को छिपाया जा रहा है या कम करके दिखाया जा रहा है।
वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरणीय योजनाओं पर संदेह
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि Great Nicobar Project से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्टडी और Updated Environmental Management Plan सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं हैं। उनके अनुसार, कम से कम 12 अलग-अलग अध्ययन विभिन्न संस्थानों द्वारा किए गए हैं, जिनमें से कई अभी भी लंबित हैं।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कुछ प्रस्तावित मिटिगेशन उपाय, जैसे बड़े पैमाने पर Coral Colonies का स्थानांतरण, व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव हैं। रमेश ने कहा कि ऐसे प्रस्ताव न केवल अवास्तविक हैं बल्कि इससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि National Green Tribunal (NGT) द्वारा गठित High-Powered Committee (HPC) की रिपोर्ट और National Centre for Sustainable Coastal Management की Field Study को भी एक साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह रिपोर्ट प्रस्तावित Transshipment Port के Coastal Regulation Zone (CRZ) स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी देती है।
सरकार पर 'गैर-पारदर्शिता' का आरोप
Jairam Ramesh ने अपने पत्र में कहा कि सरकार की ओर से जिस तरह रिपोर्ट, स्टडी और पर्यावरणीय योजनाओं को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने लिखा कि रणनीतिक महत्व का हवाला देकर पारदर्शिता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उनका कहना है कि परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) में कई गंभीर खामियां हैं और यह प्रक्रिया पर्याप्त नहीं प्रतीत होती। उन्होंने पर्यावरण मंत्री से आग्रह किया कि सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि स्वतंत्र विशेषज्ञ उनका मूल्यांकन कर सकें।
राजनीतिक बहस और विपक्ष का रुख
Great Nicobar Project को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रही है। इससे पहले भी पार्टी ने आरोप लगाया था कि यह परियोजना पर्यावरणीय संतुलन को भारी नुकसान पहुंचा सकती है और विशेष रूप से Coral Reefs और समुद्री जैव विविधता के लिए खतरनाक है।
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi भी इस परियोजना का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने हाल ही में जारी एक वीडियो में कहा था कि सरकार इस प्रोजेक्ट को रणनीतिक आवश्यकता बताकर पेश कर रही है, जबकि इसके पीछे बड़े आर्थिक हित जुड़े हो सकते हैं।
Rahul Gandhi
ने यह भी दावा किया कि परियोजना के नाम पर पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों की योजना है, जिससे स्थायी नुकसान हो सकता है। उन्होंने जनता से पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में आवाज उठाने की अपील भी की थी।
Great Nicobar Project को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ इसे रणनीतिक और विकासात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरणीय प्रभाव, पारदर्शिता की कमी और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
Jairam Ramesh
के ताजा पत्र ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में इस परियोजना पर राजनीतिक और पर्यावरणीय चर्चा और अधिक गहराने की संभावना है।
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