
ममता बनर्जी ने कोलकाता में पाकिस्तान के खतरे की धमकी दी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस (TMC) महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक विवादित बयान दिया, वहीं इस बीच ममता बनर्जी ने कोलकाता में पाकिस्तान के खतरे की धमकी दी को लेकर केंद्र की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र में TMC और इंडिया गठबंधन की सरकार बनती है, तो पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनके ‘घर में घुसकर सबक सिखाया जाएगा’। यह टिप्पणी उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की कोलकाता को निशाना बनाने वाली धमकी के जवाब में की।
ममता: पाकिस्तान ने हमले की धमकी दी
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि दो दिन पहले पाकिस्तान के मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कोलकाता पर हमला करने की धमकी दी थी, और ममता बनर्जी ने कोलकाता में पाकिस्तान के खतरे की धमकी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चुप्प हैं। उन्होंने रैली में कागज पर आसिफ का नाम लिखकर यह संदेश भी दिखाया। उनका कहना था कि केंद्र में TMC सरकार आने पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया जाएगा।
केंद्र पर सवाल
TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी अलग रैली में केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया और टीएमसी नेता ने पाकिस्तान के खतरे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट रूप से कोलकाता पर हमले की धमकी दी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस गंभीर खतरे का जिक्र तक नहीं किया। ममता ने पूछा कि क्या बंगालियों की सुरक्षा की कोई अहमियत नहीं है और क्या राज्य केवल वोटों के लिए उपयोगी है।
पाकिस्तान की धमकी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सियालकोट में कहा था कि यदि भारत कोई ‘मिसअडवेंचर’ करता है तो उनकी प्रतिक्रिया तेज, सटीक और निर्णायक होगी। उन्होंने कोलकाता को संभावित निशाना बताया और भारत पर ‘फॉल्स फ्लैग’ ऑपरेशन का आरोप लगाया, हालांकि इस आरोप के कोई सबूत नहीं दिए गए। यह विवाद पिछले साल 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था।
विपक्ष की आलोचना
अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे अत्यधिक उत्तेजक और अनुचित बताया है, जबकि TMC इसे पाकिस्तान की धमकी के खिलाफ कड़ा रुख बताया गया। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक माहौल पर असर
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही यह बयान राज्य की राजनीति को और गर्मा सकता है। राजनीतिक पार्टियां इसे चुनावी रणनीति और सुरक्षा मुद्दों के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे चुनावी प्रचार और भी तीव्र हो सकता है।
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