
ईरान संकट: नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका ने भारत से मांगी मदद
ईरान में जारी संकट ने दक्षिण एशिया और हिन्द महासागर क्षेत्र के देशों की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने से हालात और बिगड़ गए हैं। नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका ने भारत से मांगी मदद, जिससे साफ है कि मुश्किल समय में वे भारत को ही भरोसेमंद साझेदार मान रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की मल्टी-अलाइन पॉलिसी और स्थिर सप्लाई क्षमता ही इन देशों का भरोसा जीत रही है।
पड़ोसी देशों ने भारत से मदद मांगी
पड़ोसी देशों ने भारत से मदद मांगी
श्रीलंका की आर्थिक और ऊर्जा स्थिति गंभीर हो गई है। स्कूल बंद होने लगे हैं और ईंधन की किल्लत बढ़ गई है। ऐसे हालात में नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका ने भारत से मांगी मदद।राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे संपर्क किया और भारत ने मार्च में 38,000 मीट्रिक टन डीजल और पेट्रोल भेजकर तत्काल राहत दी। श्रीलंका ने इस मदद के लिए भारत का धन्यवाद किया।
नेपाल: रसोई की गैस के लिए भारत जरूरी
नेपाल में गैस की भारी कमी ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर दी है। देश में आधे सिलेंडर से काम चलाने की स्थिति बन गई है, जो ईरान संघर्ष और वैश्विक तेल संकट की वजह से और गहरी हो गई है। नेपाल ने भारत से अतिरिक्त 3,000 टन गैस की मांग की है। स्थानीय नागरिक जानते हैं कि उनकी रसोई तभी चलेगी जब भारत से सप्लाई पहुंचेगी।
बांग्लादेश और मालदीव भी भारत के भरोसे
बांग्लादेश को भारत पहले ही सालाना 1.8 लाख टन तेल सप्लाई करता है। युद्ध के कारण सप्लाई कम होने पर भारत ने पाइपलाइन के जरिए तुरंत अतिरिक्त डीजल भेजा। वहीं, मालदीव ने हाल के दिनों में रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत से तेल और गैस सप्लाई की गुहार लगाई है। भारत इन अनुरोधों पर विचार कर रहा है।
भारत की बहुपक्षीय भूमिका
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन केवल कर्ज और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देता है, जबकि भारत जीवन की बुनियादी जरूरतों जैसे तेल, गैस और बिजली में भरोसेमंद है। एशिया ग्रुप के अशोक मलिक का कहना है कि इस संकट में भारत की मदद से उसकी साख पूरे क्षेत्र में मजबूत होगी।
भारत खुद भी चुनौतियों से जूझ रहा
भारत न केवल पड़ोसी देशों की मदद कर रहा है, बल्कि खुद भी संकट का सामना कर रहा है। देश के 18 जहाज अभी युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं। बावजूद इसके भारत ने अपनी जरूरतों को पूरा करते हुए पड़ोसी देशों को सपोर्ट जारी रखा है।
हर देश के साथ संतुलित संबंध
भारत न तो पूरी तरह अमेरिका-इजरायल के साथ खड़ा है और न ही ईरान के साथ। यही संतुलित नीति पड़ोसी देशों को भरोसा दिलाती है कि भारत हर देश के साथ बातचीत कर सकता है और मुश्किल समय में मदद कर सकता है। यही भारत की क्षेत्रीय नेतृत्व की असली ताकत है।
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