Russia-India Deal: Su-57 और R-77M मिसाइल का बड़ा ऑफर दिया

Russia-India Deal: रूस ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है। यह ऑफर सिर्फ लड़ाकू विमान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ अगली पीढ़ी की R-77M Air-to-Air Missile भी शामिल है। माना जा रहा है कि यह कदम भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान के बढ़ते स्टील्थ खतरों का जवाब देने के उद्देश्य से किया गया है, यह एक महत्वपूर्ण रूस-भारत समझौता है।


रक्षा सूत्रों के अनुसार, रूस ने भारत को 40 से 60 Su-57 फाइटर जेट सीधे तैयार हालत में देने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, भविष्य में भारत में कम से कम 100 अतिरिक्त विमानों का लाइसेंस उत्पादन करने का विकल्प भी शामिल है। यह योजना पूरी तरह से ‘Make in India’ पहल और घरेलू रक्षा उत्पादन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

Russia-India Deal: दो-सीटर Su-57D: जटिल मिशनों के लिए बेहतर विकल्प

हाल ही में रूस ने Su-57 का नया दो-सीटर वर्जन Su-57D पेश किया है, जिसे विशेषज्ञ और रक्षा अधिकारी काफी पसंद कर रहे हैं। Su-57D को भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अधिक अनुकूल माना जा रहा है, क्योंकि भारत लंबे समय से दो सीट वाले लड़ाकू विमानों को जटिल मिशनों और Drone-Teaming Operations के लिए उपयुक्त मानता रहा है।

दो सीट वाले विमानों की विशेषता यह होती है कि एक पायलट मिशन नियंत्रण में रहता है, जबकि दूसरा पायलट हथियार और अन्य सिस्टम पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। ऐसे विमान आधुनिक हवाई युद्ध और जटिल ऑपरेशन्स में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

चीन और पाकिस्तान के बढ़ते खतरे 

India-Russia Defense: रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब चीन अपने J-20 स्टील्थ फाइटर बेड़े को तेजी से बढ़ा रहा है। वहीं पाकिस्तान भी भविष्य में स्टील्थ लड़ाकू विमान हासिल करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि Su-57E भारत के लिए एक Interim Stealth Platform साबित हो सकता है। यह तब तक उपयोगी रहेगा जब तक कि भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) 2030 के दशक में सेवा में नहीं आ जाता। इस विमान के आने के बाद भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी स्टील्थ क्षमता प्राप्त हो जाएगी।

R-77M मिसाइल: लंबी दूरी की मारक क्षमता

Su-57 के साथ पेश की गई R-77M BVRAAM मिसाइल अपनी विशेषताओं के कारण बेहद खतरनाक मानी जा रही है और Russia-India Deal के तहत इसे विशेष रूप से Su-57 के लिए विकसित किया गया है और यह विमान के अंदरूनी वेपन बे में फिट हो जाती है, जिससे फाइटर की स्टील्थ क्षमता सुरक्षित रहती है। R-77M की मारक क्षमता लगभग 200 किलोमीटर तक बताई जा रही है। 

इस मिसाइल में dual-pulse रॉकेट मोटर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका पहला इंजन मिसाइल को ऊंचाई तक तेजी से पहुंचाता है, जबकि दूसरा इंजन अंतिम चरण में सक्रिय होकर लक्ष्य के पास मिसाइल की गति और Maneuverability को बनाए रखता है। इस तकनीक की वजह से R-77M दुश्मन के अत्यंत फुर्तीले लड़ाकू विमानों को भी लंबी दूरी पर मार गिराने में सक्षम बनती है। इससे मिसाइल का 'No-Escape Zone' बढ़ जाता है, यानी लक्ष्य के बच निकलने की संभावना काफी कम हो जाती है।

भारतीय वायुसेना की रणनीतिक मजबूती 

Indian Air Dominance: विशेषज्ञों का कहना है कि Su-57 और R-77M के इस संयोजन से भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक और डिफेंस क्षमता में काफी सुधार होगा। चीन के J-20 और पाकिस्तान के संभावित स्टील्थ विमानों के खिलाफ यह कदम रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा, इस प्रस्ताव में भारतीय ‘Make in India’ पहल को भी प्राथमिकता दी गई है। सीधे तैयार विमान के साथ लाइसेंस उत्पादन की संभावना से भारतीय रक्षा उद्योग को नई तकनीकी क्षमताएं विकसित करने का मौका मिलेगा।

रूस का यह प्रस्ताव न सिर्फ भारत की हवाई ताकत को बढ़ाने वाला है, बल्कि यह देश को आधुनिक युद्ध तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। Russia-India Deal के तहत Su-57D और R-77M का संयोजन चीन और पाकिस्तान की बढ़ती क्षमता के सामने भारतीय वायुसेना को मजबूती देगा और आने वाले दशकों में भारत को क्षेत्रीय हवाई श्रेष्ठता बनाए रखने में मदद करेगा।

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