
NEET Paper Leak: केजरीवाल का केंद्र पर हमला, Gen Z से अपील
NEET Paper Leak: मामले को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खास तौर पर देश के युवाओं, जिन्हें उन्होंने ‘Gen Z’ कहा, उनसे सीधे संवाद किया और उन्हें इस मुद्दे पर सक्रिय होने की अपील की, NEET पेपर लीक का मुद्दा अब देशभर में गंभीर बहस का विषय बन गया है।
केजरीवाल ने कहा कि अगर युवा पीढ़ी अब भी चुप बैठी रही तो पेपर लीक की घटनाओं का सिलसिला कभी नहीं रुकेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि बार-बार पेपर लीक होने के बाद भी सख्त और स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा है।
उन्होंने कहा, मैं देश के Gen Z से सीधे बात करने आया हूं। मेरी बात ध्यान से सुनना। हर बार पेपर लीक होता है, मामला CBI को सौंप दिया जाता है, कुछ लोगों की गिरफ्तारी होती है और फिर मामला धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। क्या आप लोग यह सब सुन-सुनकर थक नहीं गए?
CBI और जांच व्यवस्था पर सवाल
CBI Probe Questions: केजरीवाल ने अपनी प्रेस वार्ता में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा धीरे-धीरे जांच एजेंसियों पर से उठता जा रहा है क्योंकि बार-बार गंभीर मामलों में ठोस परिणाम सामने नहीं आते।
उन्होंने दावा किया कि 2017, 2021 और 2024 में भी पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन इन मामलों में अब तक स्थायी समाधान या निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 में जिस व्यक्ति को मास्टरमाइंड बताया गया था, उसे गिरफ्तार तो किया गया लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उसे जमानत मिल गई।
केजरीवाल ने कहा कि देश में जांच की प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, जिसका फायदा दोषियों को मिल रहा है।
पेपर लीक की घटनाओं पर गंभीर आरोप
NEET Paper Leak: AAP प्रमुख ने दावा किया कि 2014 के बाद से देश में करीब 93 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें से कई घटनाएं उन राज्यों में हुई हैं जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, जिससे NEET पेपर लीक को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में बार-बार पेपर लीक होना सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, यह एक गंभीर प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।
केजरीवाल ने सवाल उठाया, अगर बार-बार उन्हीं राज्यों में पेपर लीक हो रहे हैं तो क्या इसमें राजनीतिक या प्रशासनिक मिलीभगत की संभावना से इनकार किया जा सकता है?
Gen Z को सड़कों पर उतरने की अपील
Gen Z Protest: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने युवाओं को खास संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब देश की युवा पीढ़ी को आगे आकर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों का युवा वर्ग सड़कों पर उतरकर सरकारों में बदलाव ला सकता है, तो भारत का Gen Z पेपर लीक जैसे मुद्दों पर कार्रवाई क्यों नहीं करा सकता।
उन्होंने कहा, अगर नेपाल और बांग्लादेश का Gen Z सड़कों पर उतरकर सरकार बदल सकता है, तो भारत का Gen Z पेपर लीक कराने वालों को जेल क्यों नहीं भेज सकता?
हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह युवाओं को उकसा रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा केवल शांतिपूर्ण विरोध की बात करना है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सुरक्षित है।
केंद्र सरकार और विदेश नीति पर टिप्पणी
NEET Paper Leak: इस मुद्दे के अलावा केजरीवाल ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने रूस से तेल और गैस आयात से जुड़े मामलों का उल्लेख किया और आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीति प्रभावित हो रही है, NEET पेपर लीक को लेकर भी देश में लगातार चर्चा और चिंता बनी हुई है।
उन्होंने दावा किया कि रूस से आने वाले एक गैस जहाज को भारत में रोका गया, जिसे उन्होंने सरकार की कमजोरी बताया। केजरीवाल ने कहा कि यदि देश के नेतृत्व पर बाहरी दबाव हावी हो रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें अपने पद पर बने रहने पर विचार करना चाहिए।
राजनीतिक बहस तेज होने के आसार
NEET पेपर लीक का मुद्दा पहले से ही देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। लगातार सामने आ रहे आरोपों और जांच प्रक्रिया को लेकर उठते सवालों के बीच केजरीवाल के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
युवाओं को सीधे संबोधित करने और उन्हें सड़कों पर उतरने की अपील करने वाला यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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