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Yogi Adityanath Decision: यूपीडा अब सीधे मुख्यमंत्री के अधीन

 09 Jun 2026

Yogi Adityanath Decision: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम प्रशासनिक बदलाव करते हुए कैबिनेट मंत्री Nand Gopal Gupta ‘Nandi’ के पास से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) का प्रभार वापस ले लिया है। अब इस विभाग से जुड़े सभी कार्य मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के सीधे नियंत्रण में आ गए हैं। सरकार ने इसे कामकाज में बेहतर तालमेल और गति लाने के उद्देश्य से लिया गया फैसला बताया है। 


सरकारी आदेश के अनुसार, यूपीडा से जुड़े सभी कार्यों को अब अवस्थापना विकास अनुभाग को सौंप दिया गया है, जो मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन आता है। इससे पहले यह जिम्मेदारी औद्योगिक विकास मंत्री Nand Gopal Gupta 'Nandi' के पास थी। इस बदलाव के बाद प्रदेश में चल रही बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया सीधे मुख्यमंत्री स्तर से होगी।

Yogi Adityanath Decision: क्यों लिया गया यह फैसला 

सूत्रों के मुताबिक 27 मई 2026 को सचिवालय प्रशासन की ओर से एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें स्पष्ट किया गया कि यूपीडा से जुड़े कार्यों में पहले अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल की कमी देखी जा रही थी। इसी कारण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी की आशंका बनी रहती थी। 

सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी और लागत वाली परियोजनाओं के लिए एकीकृत नियंत्रण प्रणाली जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए यूपीडा के सभी कार्यों को अब एक ही अनुभाग, अवस्थापना विकास अनुभाग के तहत लाने का निर्णय लिया गया है।

यूपीडा की भूमिका क्या है 

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण राज्य की सबसे महत्वपूर्ण विकास एजेंसियों में से एक है। यह संस्था प्रदेश में बड़े एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारों के निर्माण और विकास का काम देखती है। हाल ही में लिए गए Yogi Adityanath Decision के तहत इस प्राधिकरण के कार्यों और परियोजनाओं की निगरानी और समन्वय में और तेजी लाने की कोशिश की जा रही है।

गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की जिम्मेदारी इसी संस्था के पास है। जमीन अधिग्रहण, टेंडर प्रक्रिया, निर्माण एजेंसियों का चयन और निजी निवेश से जुड़े समन्वय जैसे अहम कार्य भी यूपीडा के माध्यम से ही होते हैं। इसी कारण यह विभाग राज्य के Infrastructure Development में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

सरकारी आदेश में क्या कहा गया

सचिवालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विभागों के बीच कार्य विभाजन में कुछ विरोधाभास (Overlap) सामने आ रहे थे, जिससे निर्णय लेने में देरी हो रही थी। इसे दूर करने के लिए यूपीडा से संबंधित सभी कार्य अब तत्काल प्रभाव से अवस्थापना विकास अनुभाग को सौंप दिए गए हैं। इस Yogi Adityanath Decision को प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अवस्थापना विकास अनुभाग पहले से ही बड़ी अवस्थापना परियोजनाओं की योजना बनाने और उनके समन्वय का कार्य देखता है। ऐसे में यूपीडा के कार्यों को भी इसी ढांचे में शामिल करना अधिक प्रभावी माना गया है। सरकार का दावा है कि इस कदम से परियोजनाओं की गति बढ़ेगी और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय और बेहतर होगा।

अखिलेश यादव का तंज 

Akhilesh Yadav Reactionइस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कदम राजनीतिक संकेत भी देता है। Akhilesh Yadav ने लिखा, अभी हाफ़ हुए हैं, विधानसभा में टिकट नहीं मिलेगा तो साफ हो जाएंगे। उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि जब सारे 'Shoddy Expressway' बन चुके हैं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा लक्ष्य पूरा हो गया, तब यह जिम्मेदारी वापस ली गई है तो इसका क्या अर्थ रह जाता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा अपने कई विधायकों और प्रत्याशियों को बदलने की तैयारी में है। उनके अनुसार पार्टी को यह लग रहा है कि कई जनप्रतिनिधि केवल 'कमाई' में लगे रहे और लोकसभा चुनावों में इसका असर भी दिखा।

 

भाजपा और चुनावी राजनीति पर टिप्पणी 

Akhilesh Yadav ने आगे कहा कि लगभग 225 सीटों पर उम्मीदवार बदले जाने की चर्चा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मौजूदा विधायक खुद चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं क्योंकि उन्हें जनता के गुस्से का अंदाजा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के बीच असंतोष बढ़ रहा है और इसी कारण BJP को चुनावी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। उनके मुताबिक सरकार की नीतियों के कारण जनता में नाराजगी है और इसका असर आगामी चुनावों में दिख सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार इसे परियोजनाओं की गति बढ़ाने और समन्वय सुधारने का कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर देख रहा है। Uttar Pradesh Politics के परिप्रेक्ष्य में भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यूपीडा से जुड़े सभी बड़े फैसले सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के नियंत्रण में होंगे, जिससे आने वाले समय में राज्य की एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की दिशा और गति दोनों पर असर देखा जा सकता है।

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