नीतीश कुमार का राज्यसभा में कदम: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले महीने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले हैं। सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार 8 या 9 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। इसके साथ ही वह विधान परिषद से भी इस्तीफा देंगे और बाद में राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र पहले ही दाखिल हो चुका है, जबकि 16 मार्च को वह औपचारिक रूप से राज्यसभा सदस्य चुने जाएंगे।
इसी बदलाव के साथ नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सियासी एंट्री हुई है। निशांत हाल ही में जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए हैं और आगामी सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने की संभावना है। नीतीश के करीबी सूत्रों का कहना है कि नई सरकार में निशांत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि गृह मंत्रालय बीजेपी के पास ही रहेगा।
अप्रैल में नीतीश CM पद से इस्तीफा देंगे
नीतीश के इस्तीफे के साथ उनके बेटे की नई सियासी पारी भी शुरू हो रही है। यदि नीतीश CM पद से इस्तीफा देंगे तो यह कदम पार्टी में बदलाव और नई ऊर्जा लाने वाला होगा। निशांत कुमार ने 8 मार्च को जेडीयू में शामिल होकर पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका की शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद पार्टी संगठन को मजबूत करना है। निशांत, जो इंजीनियरिंग में स्नातक हैं, को पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ललन और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की उपस्थिति में जेडीयू में शामिल कराया गया।
राजनीतिक संदेश और तैयारी
जेडीयू ने निशांत की ज्वाइनिंग को एक मेगा इवेंट के रूप में आयोजित किया। हाथी-घोड़ा, पालकी और ढोल-नगाड़ों के साथ इस आयोजन का मकसद स्पष्ट था नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बावजूद बिहार में पार्टी की एकजुटता और मजबूती को दिखाना। और साथ ही कई नेता मान रहे हैं कि यदि नीतीश CM पद से इस्तीफा देंगे तो यह कदम पार्टी के अंदर नई ऊर्जा और युवा वर्ग में उत्साह बढ़ाने वाला साबित होगा। पार्टी के नेताओं का मानना है कि निशांत के शामिल होने से पार्टी के युवा वर्ग में भी उत्साह बढ़ेगा और संगठन मजबूत होगा।
साथ ही, बिहार में राज्यसभा चुनाव की सियासी हलचल भी तेज हो गई है। हरनौत से जेडीयू विधायक हरी नारायण सिंह के अनुसार निशांत अगले महीने विधान परिषद सदस्य चुने जा सकते हैं, जो उन्हें आगामी सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने के रास्ते पर ले जाएगा।
नीतीश के फैसले का असर
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं। हालांकि राज्यसभा में शपथ लेने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होंगे, लेकिन राज्य में उनकी पार्टी और परिवार की मौजूदगी बरकरार रहेगी। निशांत का उपमुख्यमंत्री बनना पार्टी के लिए नई ताकत और नेतृत्व का संदेश भी है।