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डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ग्वांतानामो बे’ जेल में अवैध प्रवासियों को रखने का दिया आदेश, मानवाधिकारों को लेकर सवाल

 03 Dec 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्वांतानामो बे जेल में स्थित डिटेंशन सेंटर के विस्तार का आदेश दिया है। इस फैसले के तहत, अमेरिका में पकड़े गए अवैध प्रवासियों को यहां रखा जाएगा। अनुमान है कि इन प्रवासियों की संख्या लाखों में हो सकती है, और ट्रंप के इस कदम ने उन लोगों में चिंता और डर को बढ़ा दिया है, जो अमेरिका में अवैध प्रवासी घोषित किए जाने के खतरे से जूझ रहे हैं। अवैध प्रवासियों में विभिन्न देशों, जैसे ब्राजील, मेक्सिको, पाकिस्तान और अन्य जगहों से लोग शामिल हैं। भारत के कुछ नागरिकों को भी इस फैसले से प्रभावित होने का डर है। अब, इन लोगों को ग्वांतानामो बे जेल में रखा जाएगा, जो कि पूरी दुनिया में अपनी कुख्याति और मानवाधिकारों के उल्लंघन के कारण पहचानी जाती है। ग्वांतानामो बे जेल का इतिहास आतंकवाद से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए लोगों को रखने से जुड़ा हुआ है, जिसे 9/11 के आतंकी हमलों के बाद स्थापित किया गया था। इस जेल को लेकर विश्वभर में कई विवाद उठ चुके हैं, खासकर जब यह आरोप लगे कि यहां कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। 


अब, ट्रंप के आदेश के बाद इस जेल को अवैध प्रवासियों के लिए एक नए डिटेंशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स के निदेशक विंस वॉरेन ने कहा कि ग्वांतानामो बे जेल पूरी दुनिया में गैरकानूनी शासन, उत्पीड़न और नस्लीयता का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने इस फैसले को अमेरिका के इतिहास में एक शर्मनाक कदम बताया और चेतावनी दी कि इससे मानवाधिकारों पर गंभीर हमला हो सकता है। उनका मानना है कि ट्रंप का यह कदम उन लोगों के लिए भयावह साबित हो सकता है, जो पहले से ही अवैध प्रवासी घोषित किए जाने के डर से जूझ रहे हैं।

 इससे पहले, जॉर्ज बुश की सरकार के दौरान भी ग्वांतानामो बे जेल में डिटेंशन सेंटर का इस्तेमाल किया गया था, और करीब 800 मुस्लिमों को यहां रखा गया था। इन कैदियों को आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर यहां रखा गया था। इसके अलावा, हैती से आए शरणार्थियों को भी यहां रखा गया था। कई मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया था कि इस जेल में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है और उनके साथ भेदभावपूर्ण तरीके से सजा दी जाती है। ग्वांतानामो बे जेल के बारे में एक और विवाद यह है कि आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट ने 2013 से 2018 तक सीरिया और इराक में भारी हिंसा फैलाते हुए गैर-मुस्लिमों की हत्या की थी। 

इस्लामिक स्टेट ने इन हत्याओं के दौरान ग्वांतानामो बे जेल में रखे गए कैदियों के उत्पीड़न का बदला लेने का संदेश देने के लिए उनके समान नारंगी रंग के कपड़े पहनकर कत्ल किया था। इसने यह स्पष्ट किया था कि ग्वांतानामो बे जेल के कैदियों के उत्पीड़न का विरोध जताया जा रहा था। अब, ट्रंप का आदेश फिर से ग्वांतानामो बे जेल को विवादों के केंद्र में ला रहा है, और इस पर दुनिया भर में चर्चा हो रही है। विंस वॉरेन ने यह भी कहा कि शुरूआत में 30,000 अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार किया जा सकता है, जिन्हें ग्वांतानामो बे जेल में रखा जाएगा। इससे यह साफ जाहिर होता है कि अमेरिका इन प्रवासियों को आतंकवादियों के समान एक खतरे के रूप में देख रहा है। उनका यह भी कहना है कि वह ट्रंप के इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वे पहले भी ग्वांतानामो बे जेल के खिलाफ 23 वर्षों तक मुकदमा लड़ा चुके हैं और इस बार भी वह इसे चुनौती देंगे। 

 इस फैसले ने दुनिया भर में मानवाधिकार, कानून, और प्रवासन के मुद्दों पर एक नई बहस को जन्म दिया है। अगर यह योजना लागू होती है, तो यह ग्वांतानामो बे जेल के इतिहास को एक नया मोड़ दे सकता है और पूरी दुनिया में इसका असर पड़ सकता है, खासकर उन लाखों अवैध प्रवासियों पर जो अब तक अमेरिका में एक बेहतर जीवन की तलाश कर रहे थे।

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